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राकेश धर द्विवेदी : मोरे पिया घर आए

काव्य डेस्क

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                            हे री सखी....
        
                                                    
                            
मोरे पिया घर आए 
रिमझिम-रिमझिम बरसातों में 
सो न सकी सारी रैना 
भोर हो गई मीठी-मीठी बातों में।

हे री सखी...
मोरे पिया घर आए,
दूर पपीहा दादुर बोले 
कजरी की धुन सुन मोरा मन डोले 
कि कौन सी धुन मैं 
सुनाऊं पिया का 
जिससे बालम का मन मोरा डोले 
और पास में नाचे मयूरी 
मोरे उपवन में छा जाए।

हे री सखी 
मोरे पिया घर आए।

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3 महीने पहले
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