विज्ञापन

राकेश धर द्विवेदी की कविता- अब सिर्फ उसकी यादें हैं

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            छोटी सी बात को 
        
                                                    
                            
वह पहाड़ बना देती थी,
उसकी बेरुखी सचमुच 
जिंदगी को पहाड़ बना देती थी।

याद आती हैं उसकी मीठी बातें 
जब मन की रंगोली से 
वह अपने सपनों का 
इंद्रधनुष बना देती थी। 
जिंदगी को खुशगवार और 
मुकम्मल बना देती थी।

अब सिर्फ यादें हैं...
उसकी हसरतें लिए 
ताउम्र दौड़ रहा हूं,
इक उम्र के बाद 
फीके पड़ने लगे हैं रंग,
तो वह लौट आई हैं 
सारी यादें लेकर।

मन के कोने में 
वह जलाती है दीप। 
अब रोशनी है और 
उसका झिलमिलाता चेहरा।
मुकम्मल हो रही है 
जिंदगी कुछ इस तरह कि
बेरुखी की दीवार 
अब ढहने लगी है। 
प्रेम फिर लौट आया है 
उड़ने लगा है आसमान में,
सपनों का इंद्रधनुष 
फिर दिखने लगा है।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Parul Bhaktani

1570 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10106 कविताएं

View Profile