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पाश: सपने हर किसी को नहीं आते

काव्य डेस्क

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सपने


हर किसी को नहीं आते

बेजान बारूद के कणों में
सोई आग को सपने नहीं आते
बदी के लिए उठी हुई
हथेली के पसीने को सपने नहीं आते
शेल्फ़ों में पड़े
इतिहास-ग्रंथों को सपने नहीं आते

सपनों के लिए लाज़िमी है
झेलने वाले दिलों का होना
सपनों के लिए
नींद की नज़र होना लाज़िमी है

सपने इसलिए
हर किसी को नहीं आते 
अनुवाद - चमन लाल 
 
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2 महीने पहले
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