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Hindi Kavita: महादेवी वर्मा की कविता 'मां के ठाकुर जी भोले हैं'

काव्य डेस्क

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                            ठंडे पानी से नहलातीं,
        
                                                    
                            
ठंडा चंदन इन्हें लगातीं,
इनका भोग हमें दे जातीं,
फिर भी कभी नहीं बोले हैं।
माँ के ठाकुर जी भोले हैं। 

2 वर्ष पहले
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