गोद खाली हो गयी
मांग सूनी हो गयी
आंख का झरना लगा
बरसात दूनी हो गयी
तुझको लेने के लिये, घर से गया फिर घर न आया
आने वाली आ गयी, पर लाने वाला क्यों न आया।
झोपड़ी में आज भी है
खांसता कंकाल देखो
मुक्त केशी घूमती है
उसकी सूनी मांग देखो
जिसकी यादों में बिलखकर
सिसकता हर साल सावन
जिससे मिलने भागता है
नीर गंगा का सुहावन
नाम अपना रख धरोहर, जो विजन में जा लुकाया
आने वाली आ गयी, पर लाने वाला क्यों न आया।
रूप आर्यावर्त का दीपक
बना हंसता रहा
तूफान के परिहास में
दामन यहां जलता रहा
शौर्य का जिसके समय
ने पागलों सा गीत गाया
आन पर जिंदा जला दो
गज कफन तक भी न पाया
शंभु बनकर पी गरल, जिसने हमें अमृत पिलाया
आने वाली आ गयी, पर लाने वाला क्यों न आया।
जग रहा हिमवान अब तक
प्राण को पत्थर बनाकर
जलियांवाला बाग कहता
देह को अपनी ढहा कर
थपकियां दे करके मेरे
देश मुझको मत सुलाओ
वो हमारी आंख में हैं तुम
भी उनको मत भुलाओ
शून्य में लहरा तिरंगा, आज जिनको है बुलाया
आने वाली आ गयी, पर लाने वाला क्यों न आया।।
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।