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अश्वघोष की कविता- नए साल में प्यार लिखा है तुम भी लिखना

काव्य डेस्क

Kavita
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                            नए साल में
        
                                                    
                            
प्यार लिखा है
तुम भी लिखना

प्यार प्रकृति का शिल्प
काव्यमय ढाई आखर
प्यार सृष्टि पयार्य
सभी हम उसके चाकर

प्यार शब्द की
मयार्दा हित
बिना मोल, मीरा-सी-बिकना

प्यार समय का कल्प
मदिर-सा लोक व्याकरण
प्यार सहज संभाव्य
दृष्टि का मौन आचरण

प्यार अमल है ताल
कमल-सी,
उसमें दिखना।

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