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Happy Holi 2026: लोकगीत- आज बिरज में होरी रे रसिया

काव्य डेस्क

Kavita
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                            आज बिरज में होरी रे रसिया॥ 
        
                                                    
                            
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया॥ 

कौन के हाथ कनक पिचकारी,
कौन के हाथ कमोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी,
राधा के हाथ कमोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

अपने-अपने घर से निकसीं,
कोई श्यामल, कोई गोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

उड़त गुलाल लाल भये बादर,
केशर रंग में घोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

बाजत ताल मृदंग झांझ ढप,
और नगारे की जोड़ी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

कै मन लाल गुलाल मँगाई,
कै मन केशर घोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

सौ मन लाल गुलाल मगाई,
दस मन केशर घोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

‘चन्द्रसखी’ भज बाल कृष्ण छबि,
जुग-जुग जीयौ यह जोरी रे रसिया॥ 
होरी रे रसिया, बरजोरी रे रसिया

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