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Hindi Kavita: भवानीप्रसाद मिश्र की कविता 'तुम नहीं समझोगे'

काव्य डेस्क

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तुम नहीं समझोगे केवल किया हुआ


इसलिए अपने किये पर
वाणी फेरता हूँ
और लगता है मुझे
उस पर लगभग पानी फेरता हूँ

तब भी नहीं समझते तुम
तो मैं उलझ जाता हूँ
लगता है जैसे
नाहक अरण्य में गाता हूँ

और चुप हो जाता हूँ फिर
लजाकर
अपनी वाणी को
इस तरह स्वर से सजाकर।

3 वर्ष पहले
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