विज्ञापन

Hindi Kavita: भवानीप्रसाद मिश्र की कविता 'तुम नहीं समझोगे'

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

तुम नहीं समझोगे केवल किया हुआ


इसलिए अपने किये पर
वाणी फेरता हूँ
और लगता है मुझे
उस पर लगभग पानी फेरता हूँ

तब भी नहीं समझते तुम
तो मैं उलझ जाता हूँ
लगता है जैसे
नाहक अरण्य में गाता हूँ

और चुप हो जाता हूँ फिर
लजाकर
अपनी वाणी को
इस तरह स्वर से सजाकर।

3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12618 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

30 कविताएं

View Profile