विज्ञापन

भवानीप्रसाद मिश्र: बच्चे की तरह हँसे और जब रोए तो बच्चे की तरह

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


बच्चे की तरह हँसे
और जब रोए तो बच्चे की तरह
ख़ालिस सुख ख़ालिस दुख

न उसमें ख़याल कुछ पाने का
न मलाल इसमें कुछ खोने का
सुनहली हँसी और आँसू रुपहले
दोनों ऐसे कि मन बहला
उससे भी इससे भी

कोरे क़िस्से भी अंश हो गए अपने
हर छाया के पीछे दौड़ाया सपनों ने
और दब गई पाँवों के नीचे दौड़ते-दौड़ते
कोई छाया

तो हँसे खिलखिलाकर बच्चों की तरह
और छूट गया
हाथ छाया का आकर हाथ में
तो रोये तिलमिलाकर बच्चों की तरह
ख़ालिस सुख
ख़ालिस दुख!
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

13199 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10960 कविताएं

View Profile

Dr fouzia

6915 कविताएं

View Profile