विज्ञापन

अमरनाथ श्रीवास्तव: जब अकेले तुम चले थे, तब तुम्हारे साथ क्या था

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            


जब अकेले तुम चले थे
तब तुम्हारे साथ क्या था
नर्मदा के जल बताओ

था तुम्हारे पास ऐसा क्या
कि अपना घर बसाओ
आदिवासी अमरकण्टक पिता -
क्या देता बताओ
तुम्हें रचने में किसी -
सम्भावना का हाथ क्या था
नर्मदा के जल बताओ

सतपुड़ा के जंगलों का -
सो गया संसार जैसे
देखता आकाश भूखे भील -
का परिवार जैसे
किन्तु ऐसी नीन्द पर
अविरल, अनन्त प्रपात क्या था
नर्मदा के जल बताओ

थकी-हारी देह टूटी
बँध गए तुम फ़ासलों में
एक लम्बी उम्र गुज़री
पत्थरों के काफ़िलों में
आँख भर आई जहाँ
जल का वहाँ अनुपात क्या था
नर्मदा के जल बताओ

इस तरह खुलकर
गले मिलती हुई नदियाँ कहाँ थीं
संगमरमर के कगारों की -
मुखर छवियां कहां थीं
तब कहां तीरथ बने थे
और भेड़ाघाट क्या था
नर्मदा के जल बताओ

2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Chandra prakash

28 कविताएं

View Profile

rashmi gupta

191 कविताएं

View Profile