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केरल त्रासदी: बाढ़ का दंश उकेरती यह ग़ज़ल

काव्य डेस्क

Irshaad
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केरल में आयी बाढ़ की त्रासदी का दर्द इस वक़्त पूरा देश महसूस कर सकता है और उसी बाढ़ के दर्द को गायक हरिहरन ने अपने शब्दों और आवाज़ में ढाला है। 



दर्द के रिश्ते न कर डालें उसे बेकल कहीं
हो गयीं इस साल भी कुछ बस्तियां जल-थल कहीं

रात की बेरंगियों में हम बिछड़ जाएं न दोस्त
हाथ मेरे हाथ में दे और यहां से चल कहीं

आ सूरज ख़ुद ही अपनी रौशनी में जल गया
कह रहा था राज़ की ये बात एक पागल कहीं

ये ख़बर होती तो करता कौन बारिश की दुआ
प्यास से हम मर गए रोता रहा बादल कहीं


8 वर्ष पहले
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