विज्ञापन

नींबू के पत्ते की नोक पर ठिठकी जनवरी की ओस ने कहा, नया साल मुबारक हो...

काव्य डेस्क

Irshaad
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            झाड़ियों के उलझाव से
        
                                                    
                            
बाहर निकलने की कोशिश में
बैलों के गले में बँधी घंटियाँ बोल उठीं
नया साल मुबारक हो

बिगड़ी गाड़ी को
बड़ी देर से ठीक करने में जुटा मैकेनिक
गाड़ी के नीचे से उतान स्वरों में ही बोला
नया साल मुबारक हो

बरसों से मंगली लड़का ढूँढ़ते-ढूँढ़ते परेशान माँ-बाप को देख
नींबू के पत्ते की नोक पर ठिठकी
जनवरी की ओस ने कहा
नया साल मुबारक हो

कल बुलडोजर की आसानी के लिए
आज घर को चिह्नित करते कर्मचारी को देख
घर का छोटा बच्चा दूर से ही बोला पंचम में
नया साल मुबारक हो अंकल
नया साल मुबारक हो...

- हरीशचंद्र पांडे हिंदी साहित्य के जाने माने कवि हैं। इनका जन्म दिसंबर 1952 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था। इनकी मुख्य कृतियां कविता संग्रह, कुछ भी मिथ्या नहीं है, एक बुरूंश कहीं खिलता है, भूमिकाएं खत्म नहीं होतीं, असहमति कहानी संग्रह है। 
साभार : कविता कोश 
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12470 कविताएं

View Profile

Ramesh Raj

25 कविताएं

View Profile