झाड़ियों के उलझाव से
बाहर निकलने की कोशिश में
बैलों के गले में बँधी घंटियाँ बोल उठीं
नया साल मुबारक हो
बिगड़ी गाड़ी को
बड़ी देर से ठीक करने में जुटा मैकेनिक
गाड़ी के नीचे से उतान स्वरों में ही बोला
नया साल मुबारक हो
बरसों से मंगली लड़का ढूँढ़ते-ढूँढ़ते परेशान माँ-बाप को देख
नींबू के पत्ते की नोक पर ठिठकी
जनवरी की ओस ने कहा
नया साल मुबारक हो
कल बुलडोजर की आसानी के लिए
आज घर को चिह्नित करते कर्मचारी को देख
घर का छोटा बच्चा दूर से ही बोला पंचम में
नया साल मुबारक हो अंकल
नया साल मुबारक हो...
- हरीशचंद्र पांडे हिंदी साहित्य के जाने माने कवि हैं। इनका जन्म दिसंबर 1952 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था। इनकी मुख्य कृतियां कविता संग्रह, कुछ भी मिथ्या नहीं है, एक बुरूंश कहीं खिलता है, भूमिकाएं खत्म नहीं होतीं, असहमति कहानी संग्रह है।
साभार : कविता कोश