प्रेम और प्रेमपत्र का रिश्ता ठीक वैसा ही है जैसे बादल और बारिश का, जैसे धरती से अपनी मुहब्बत के इज़हार के लिए बादल पानी के ज़रिए अपना संदेश भेजते हैं ठीक वैसे ही अपने प्यार को ज़ाहिर करने के लिए प्रेमी प्रेमपत्र का सहारा लेते हैं। वह इन पत्रों को बरसों तक संभाल कर रखते हैं कि उनके मन का प्रेमांकुर फ़लता-फूलता रहे। वह बचाकर रखते हैं इन्हें हर मौसम की मार से ताकि बेमौसम इन्हें पढ़कर दिल के मानसून को सुकून मिल सके।
प्रेमियों के इसी पत्र पर प्रस्तुत हैं कवि बद्रीनारायण के यह भाव
किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र
गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा
चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुराएगा
जुआरी प्रेमपत्र ही दांव लगाएगा
ऋषि आयेंगे तो दान में मांगेंगे प्रेमपत्र
विज्ञापन
बारिश आयेगी तो प्रेमपत्र ही गलाएगी
आग आयेगी तो जलाएगी प्रेमपत्र
बंदिशें प्रेमपत्र ही लगाई जाएंगी
सांप आएगा तो डसेगा प्रेमपत्र
झींगुर आयेंगे तो चाटेंगे प्रेमपत्र
कीड़े प्रेमपत्र ही काटेंगे
प्रलय के दिनों में सप्तर्षि मछली और मनु
सब वेद बचायेंगे
कोई नहीं बचायेगा प्रेमपत्र
कोई रोम बचायेगा कोई मदीना
कोई चांदी बचायेगा कोई सोना
मै निपट अकेला कैसे बचाऊंगा तुम्हारा प्रेमपत्र