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बेढब बनारसी की हास्य पैरोडी: मैं खद्दर का मोटा कपड़ा तुम हो बनारसी साड़ी

काव्य डेस्क

Hasya
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                                                  मैं सीधा सादा अध्यापक तुम हो नवयुगकी बाला
तुम 'टेनिस बाल' मैं रैकेट ,
मैं एन. ई. आर. का थर्ड क्लास तुम राज्यपाल की गाड़ी 
मैं खद्दर का मोटा कपड़ा तुम हो बनारसी साड़ी
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तुम गोरी हो मैं श्यामल
तुम 'रोल्स-रैस' की नई कार मैं 'फोर्ड' पुराना 'माडल' 

मैं जव का हूँ मोटा सत्तू तुम हो खस्ते की पूरी,
मैं कुंद कुल्हारा बिना बेट तुम हो राजिस की छूरी 

तुम ताजा हो मैं बासी 
तुम सिटी लखनऊ हो सुन्दर मैं मस्त नगर हूँ काशी 

मैं बथुआ का हूँ साग और तुम हो कश्मीरी केसर 
मैं सेशन कोर्ट का अपराधी तुम बैठी बनी अफीसर

तुम कोकिल हो मैं कौवा 
तुम रामतरोई हो कोमल मैं छप्पर पर का लौवा 

मैं भारतीय अनपढ़ अपार तुम हो लन्दन की गुड़िया 
मैं देसी चूरन अमलवेद तुम हो कुनैन की पुड़िया

तुम मटनचाप मैं भरता 
तुम 'सिमसन' मैं 'एडवर्ड', प्रेम हित जो गद्दी 'किक' करता 

मैं अनपढ़ हूँ बेढब गँवार तुम 'अपटूडेट' लासानी 
मैं हिन्दी भाषा दीन हीन तुम हो अंगरेजी बानी

तुम तोप और मैं लाठी 
तुम रामचरित मानस निर्मल मैं रामनरेश त्रिपाठी 

(निरालाजी की कविता 'तुम और मैं ' की पैरोडी)
एक वर्ष पहले
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