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रुबरू की प्रस्तुति: सोहनी महिवाल एक संगीतमय नाटक का मंचन

काव्य डेस्क

Halchal
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रुबरू की प्रस्तुति -सोहनी महिवाल(संगीतमय नाटक )


जिसका लेखन और निर्देशन किया काजल सूरी ने इसका एल टी जी सभागार में  16 दिसंबर को रुबरु थिएटर के कलाकारों द्वारा मंचन किया गया ! पंजाब की लोककथाएँ प्रेम और अनुराग के संबंधों में धड़कती कहानियाँ हैं। इसलिए कि भारत की आजादी से पहले, पाकिस्तान में स्थित क्षेत्रों में भी ये गूँज छोड़ रही हैं। लोकगीतों में इनके संदर्भ उभरते हैं—टप्पे, सिट्ठणियाँ, बोलियाँ, गिद्दे अथवा भाँगड़े हैं। अविभाजित पंजाब में लोककथाओं की भरपूर विरासत है। लोक-व्यवहार, लोक-परंपरा से लेकर लोक-गीतों में भी हमारे यहाँ कहानियों की भरमार है। हीर-रांझा, सस्सी-पुन्नू, शीरी-फरहाद या सोहनी-महिवाल जैसी सैकड़ों प्रेमकथाएँ हैं, जिनमें लोक-रंग गहरा उभरा है और इन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी हम सुनते आए हैं। 

नाटक सोहनी महिवाल ये कहानी है अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त की, सोहनी और महीवाल की।
(पंजाबी भाषा में सोहनी अर्थ है  खूबसूरत।  और महिवाल का अर्थ है भैंस बकरी चराने वाला चरवाहा)

एक कुम्हार के घर में पैदा होने वाली सोहनी थी ही इतनी सुंदर की उसका नाम ही सोहनी रख दिया।
जब वो बड़ी हुई तो एक व्यापारी जो की मटके ख़रीदने गया था सोहनी की एक झलक पाते ही सोहनी से इश्क़ कर बैठा। लेकिन  जब गाँव वालों को इसकी भनक लगी तो सोहनी के बाप को कह कह के उसकी शादी किसी और से करवा दी गयी। वो व्यापारी जिसकी सारी पूँजी ख़त्म ही गई थी मटके ख़रीदने में और जो सोहनी के गाँव में भैंसे चराने लगा था वो महीवाल के नाम से जाना जाने लगा, रोज़  चिनाब नदी पार करके सोहनी से मिलने आता था। सोहनी भी घड़े का सहारा ले कर चिनाब ज़ैसे दरिया को पार करती थीं। लेकिन क़िस्मत की कुछ और ही मंज़ूर था। एक रोज़ उसकी ननद पक्के मटके को कच्चे मटके से बदल देती है जो पानी में आसानी से घुल जाता है। इस संगीतमय नृत्य नाटक में कलाकारों में जसकिरन चोपड़ा,अन्नु शर्मा,शुभम, सचिन,रोज़सैनी,आफताब,कृष,संदीप,स्पर्श, नेहा,तनीषा,दीपक,शिवम,गीता सेठी,अवनीत कौर ,बिंदिया,आशा, साहिल,गुंजन,शिवानी,मुस्कान ने अपने अभिनय और भावपूर्ण पारंपरिक नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया।

मेकअप किया रशीद दा ने,संगीत संचालन नीरज तिवारी,प्रकाश संचालन सुनील चौहान ने किया बैक स्टेज को संभाला गौतम जायसवाल ,रोहित कुमार,सत्यम, इला दीपक मोरियाल,शील कालिया,गुंजन ने। मंच संचालन किया जानी मानी मीडिया कर्मी  सुखनंदन बिंद्रा और अदिता चौधरी ने ! पंजाब की इस मशहूर और भावपूर्ण कहानी को देखने के लिए सभागार में दर्शकों की भीड़ उमड़ी थी।
दर्शक दीर्घा में कई गणमान्य दर्शकों की उपस्थिति भी रही जिनमे,पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार वार्ड की निगम पार्षद  मोनिका पंत,हिंदी भवन गाजियाबाद के महामंत्री सुभाष गर्ग,डी.एस.उद्योग में निदेशक मीना शर्मा, और मशहूर किताब वाली आंटी संजना तिवारी विशष्ट व विशेष अतिथि रहे। ये प्रस्तुति दर्शकों के दिलों पर आपनी छाप छोड़ने में पूरी तरह सफल रही।
2 वर्ष पहले
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