उपन्यास ‘टोंब ऑफ सैंड’ के लिए बुकर पुरस्कार से सम्मानित जानी-मानी लेखिका गीतांजलि श्री ‘भारतीय भाषाओं में महिला लेखन’ पर अपने विचार रखेंगी। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में 16 जून से तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘उन्मेष’ चल रहा है। गीतांजलि श्री इस उत्सव के समापन सत्र में वायसराय सभागार में विशेष रूप से बोलेंगी।
सत्र से पहले पत्रकारों ने जब उनसे बुकर संबंधी सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि चाहें बुकर हो या कोई भी सम्मान हो, वह एक पल के लिए आप पर रौशनी फेंक कर कहता है कि वहां देखिए और जब आप वहां देखते हैं तो पाते हैं कि आपकी कृति अकेली नहीं है। आप जिस ज़मीन से निकले हैं वहां बहुत सी कृतियां हैं, बहुत से लेखक और भी हैं। किसी भी पुरस्कार का काम है कि वह उस ज़मीन पर रौशनी करता रहे और लोगों का काम है कि वह उस ज़मीन को देखें न कि बुकर को देखते रहें। लोग टॉर्च पर ध्यान देते हैं, रौशनी पर नहीं।
अनुवाद के बारे में पूछने पर कहा कि, जब आप टॉलस्टॉय की अन्ना केरेनीना पढ़ते हैं तो अनुवाद की वजह से अन्ना केरेनीना अच्छी कृति हो गई, ये तो आप नहीं कहेंगे। वह किसी भी अनुवाद में अन्ना केरेनीना ही रहेगी। हा्ं, ये हो सकता है कि आप कहें कि ये अनुवाद अच्छा नहीं हुआ है।
भाषा और शिल्प के सवाल पर गीतांजलि ने कहा कि यह पाठक और आलोचक तय करेंगे।