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आपातकालीन पत्रकारिता की संघर्ष-गाथा: आपातकाल की पीड़ा...

काव्य डेस्क

Book Review
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भारत के इतिहास में तीन बार आपातकाल की स्थिति बनी। पहली बार 26 अक्तूबर 1962 में, दूसरी बार 3 दिसंबर, 1971 में और तीसरी 26 जून, 1975 में। सन 1975 में जब सरकार ने आपातकाल घोषित किया था, तब भारतीय प्रेस पर पहली बार सेंसरशिप लगाया गया था। आपातकाल की उसी पीड़ा को प्रो. अरुण कुमार ने अपनी पुस्तक का विषय बनाया है। विभिन्न अवसरों पर इस विषय पर उनके द्वारा लिखे गए आलेख और शोध पत्रों को एक खंड में शामिल किया है और उस दौरान भुक्तभोगी रहे कई वरिष्ठ पत्रकारों के साक्षात्कारों को खंड दो में जगह दी है। तमाम शोध परक आलेखों को पढ़कर लेखक की मेहनत का अंदाजा लगाया जा सकता है। 



किताब- आपातकालीन पत्रकारिता की संघर्ष-गाथा
लेखक- प्रो. अरुण कुमार भगत
प्रकाशक- अनामिका प्रकाशन, नई दिल्ली
मूल्य-900 रुपये
8 वर्ष पहले
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