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हिंदी फ़िल्मों के ऐसे यादगार भजन, जो आपको खींचते हैं ईश्वर के नज़दीक

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  हिंदी फ़िल्मों में ईश्वर को कई बेहतरीन गीतों और भजनों के ज़रिए याद किया गया। विपत्ति में तो हर कोई ईश्वर को याद करता ही है। फ़िल्मों में दुख की घड़ी में नायक या नायिका प्रभु से गुहार लगाते हैं। पुरानी और नई सभी तरह की फिल्मों में ईश्वर को लेकर अच्छे गीत लिखे जाते रहे हैं। सुमधुर संगीत के साथ सर्वश्रेष्ठ गायकों ने इन गीतों को पूरी तान के साथ गाकर दर्शकों को भक्तिभाव से भर दिया है। इस खंड में हम आपको बॉलीवुड ‌के दस सबसे बेहतरीन गीत-भजनों का परिचय देंगे।

भाव विव्हल करने वाले गीत-भजनों में सबसे लोकप्रिय भजन 'बड़ी देर भई नंदलाला, तेरी राह तके बृजबाला' को कहा जा सकता है। 1965 में रिलीज फिल्म 'खानदान' का यह भजन सुनील दत्त पर फिल्माया गया है। राजेंद्र कृष्‍ण के लिखे इस गीत में मोहम्मद रफी की दिलकश आवाज़ आज भी जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूरे देश में गूंजती रहती है। संगीतकार रवि ने इसमें अपना मधुर संगीत दिया है। फिल्म की कहानी को देखते हुए यह गीत काफी महत्वपूर्ण है। 

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मुझे अपनी शरण में ले लो राम...

भगवान श्री राम

देश में भगवान राम के अनन्य भक्तों की कमी नहीं है। राम को आदर्श पुरुष माना जाता है। भगवान राम की भक्ति को इस भजन में बड़ी संजीदगी से पेश किया गया है। 1954 में रिलीज फिल्म 'तुलसीदास' का यह गीत जीएस नेपाली ने लिखा है। मोहम्मद रफी ने इसमें अपनी ‌दिलकश आवाज दी है और पुराने जमाने के विख्यात संगीतकार चित्रगुप्त ने संगीत दिया है। गीत में राम को अाराध्य मानकर अपना सब कुछ अर्पण करने की बात कही गई है। 


 

हे नाम रे सबसे बड़ा तेरा नाम रे, ओ शेरोवाली  

अमिताभ-रेखा

1979 में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर अभिनीत फिल्म 'सुहाग' में मां दुर्गा पर रचा गया यह भजन काफी लोकप्रिय है। नवरा‌त्रि के दिनों में यह भजन आज भी सुनाई पड़ता है। अमिताभ और रेखा की जोड़ी ने इस भजन पर मोहक गरबा किया है। आशा भोंसले और मोहम्मद रफी की कर्णप्रिय आवाज से यह गीत हमेशा के लिए यादगार हो गया है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने इसमें संगीत दिया है। 


 

तारीफ तेरी निकली है दिल से, आई है लब पे बन के कव्वाली 

रिषि कपूर

1977 में रिलीज फिल्‍म 'अमर अकबर एंथोनी' का यह गीत सांई के भक्तों के लिए एक तरह से संजीवनी है। मोहम्मद रफी की आवाज में यह गीत और कर्णप्रिय हो गया है। रफी की लंबी मधुर तान ने गीत को भाव से भिगोकर रख दिया है। भजन के बाद नायक के मां की आंखों की रोशनी वापस आने का दृश्य तो बहुत ही मोहक है। गीत आनंद बक्षी का है। लक्ष्मीकांत प्यारे लाल ने इसमें संगीत दिया है। 

ओ दुनिया के रखवाले...

भारत भूषण

1952 में रिलीज फिल्म 'बैजू बावरा' का यह गीत मोहम्मद रफी की हिंदू भजनों के प्रति लगाव का सबसे बेहतर प्रमाण कहा जा सकता है। 'ओ दुनिया के रखवाले, सुन दर्द भरे मेरे नाले' के बोल के जरिए आज भी एक दुखी व्यक्ति अपने ईश को याद करता है। शकील बदायूंनी ने इसे लिखा है। नौशाद ने इसमें संगीत दिया है। मुस्लिम गीतकार, गायक और संगीतकार की तरफ से हिंदू भाईयों को यह एक‌ अनुपम भेंट कही जा सकती है। 

तू प्यार का सागर है, तेरी एक बूंद के प्यासे हम 

बलराज साहनी

1965 में रिलीज फिल्म 'सीमा' में बलराज साहनी पर फिल्माया यह गीत-भजन ईश्वर के लिए एक आतुर मन की व्याख्या करता है। इसमें बोल हैं कि 'लौटा जो दिया तूने चले जाएंगे यहां से हम' यह बोल दर्शाते हैं कि एकमात्र तू ही हमारा सहारा है और अगर तू ही हम पर ध्यान नहीं देगा तो हम अकेले रह जाएंगे। शैलेंद्र ने इस गीत को लिखा है। मन्ना डे इसमें अपनी मधुर आवाज दी है। शंकर जयकिशन ने इसमें संगीत दिया है। 

रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग आएगा 

दिलीप कुमार

1970 में रिलीज फिल्म 'गोपी' में अभिनय सम्राट दिलीप कुमार पर फिल्माया यह गीत भविष्य की झलक दिखलाता है। महेंद्र कपूर की बेहतरीन आवाज ने इस गीत में चार चांद लगा दिए हैं। इसमें बोल हैं कि 'हंस चुगेगा दाना तिनका, कौवा मोती खाएगा'। मतलब सच्चा आदमी भटकेगा त‌था झूठे आदमी के पास गुलशन होगा। गीत राजेंद्र कृष्‍ण ने लिखा है तथा कल्याण जी आनंद जी इसमें संगीत दिया है। गीत फिल्म की कहानी को परिभाषित करता है। 

इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना

अंकुश

1986 में रिलीज फिल्म 'अंकुश' का यह गीत हर टूटे मन को एक बड़ी दिलासा देता है। दुखी व्यक्ति के मन को अटूट शक्ति देता है। यह गीत ईश्वर से प्रार्थना है। ‌गीत को अभिलाष ने लिखा है। इसमें आवाज पुष्पा पागधरे और सुषमा श्रेष्ठ ने दी है। कुलदीप सिंह ने इसमें संगीत दिया है।   


 

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम 

दो आंखे बारह हाथ

1958 में रिलीज फिल्म 'दो आंखे बारह हाथ' का यह गीत बुराई पर अच्छाई की जीत का सबसे बेहतर प्रमाण कहा जा सकता है। इस गीत में नुकसान पहुंचाने वाले डाकुओं को इंसानियत के नाम पर मदद पहुंचाई जाती है। भरत व्यास ने इस गीत को लिखा है। वसंत देसाई ने इसमें संगीत दिया है। लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज से इस गीत को जीवंत कर दिया है।   

राम जी की निकली सवारी, राम जी की लीला है न्यारी 

सरगम

1979 में रिलीज फिल्म सरगम का यह गीत भगवान राम की महिमा का वर्णन बखूबी करता है। दशहरे में दशानन रावण पर विजय करने के लिए रामजी की सवारी निकलती है तो यह गीत बजता है। गीत सुनकर व्यक्तियों के मन-भावों में राम का नाम समा जाता है। मोहम्मद रफी ने इस गीत में भी अपनी मधुर आवाज दी है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने इसमें संगीत दिया है। गीत को आनंद बक्षी लिखा है। यह गीत नायक ऋषि कपूर पर फिल्माया गया है। 


 

भर दो झोली मेरी या मुहम्मद, लौटकर मैं ना जाऊंगा खाली 

सलमान खान

2015 में रिलीज फिल्म बजरंगी भाईजान में नायक सलमान खान की इच्छा को पूरी करने के उद्देश्य से इस गाने का फिल्मांकन किया गया है। नायक सलमान खान एक मासूम बच्ची को उसके वतन पाकिस्तान छोड़ने जाता है। तब इस दौरान उसे होने वाली मु‌श्किलों को दूर करने के लिए यह गाना एक प्रार्थना के रूप में फ़िल्माया गया है। अदनान सामी ने इसे गाया है। प्रीतम दा ने इसमें संगीत दिया है। कौसर मुनीर ने इस गीत को लिखा है।



 
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