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आज का विचार: राही मासूम रज़ा

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
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                            नई नस्ल तो हमारी नस्ल से भी ज़्यादा घाटे में है। हमारे पास कोई ख़्वाब नहीं है। मगर इनके पास तो झूठे ख़्वाब हैं।
        
                                                    
                            
- राही मासूम रज़ा  

        
                                                    
                            


        
                                                    
                            
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