अदालत ने कहा कि यह सच है कि संबंधित खंड विकास परिषद के अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव की अध्यक्षता करने, प्रस्ताव को पढ़ने, बहस करने और ऐसी बैठक में मतदान करने के लिए अधिकृत हैं। उन्हें प्रस्ताव का परिणाम घोषित करने का भी अधिकार है, लेकिन उन्हें बैठक बुलाने का हक नहीं है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पंचायती राज अधिनियम के अनुसार सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए बीडीसी (खंड विकास परिषद) अध्यक्ष अधिकृत नहीं है। इसके साथ ही कुपवाड़ा जिले के मील्याल बीडीसी अध्यक्ष के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें दर्द हरी हलका की पंचायत के एक सरपंच को बहुमत साबित करने के लिए कहा गया था।
अदालत ने कहा कि यह सच है कि संबंधित खंड विकास परिषद के अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव की अध्यक्षता करने, प्रस्ताव को पढ़ने, बहस करने और ऐसी बैठक में मतदान करने के लिए अधिकृत हैं। उन्हें प्रस्ताव का परिणाम घोषित करने का भी अधिकार है, लेकिन उन्हें बैठक बुलाने का हक नहीं है। जम्मू-कश्मीर पंचायती राज नियम 1991 के नियम 81 में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
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अदालत ने कहा अधिनियम के अनुसार, पंचायत सचिव को अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के इरादे की लिखित सूचना मिले उस पर पंचायत के कुल सदस्यों में से कम से कम एक तिहाई सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हों और उनमें से कम से कम 2 लोगों द्वारा उसे व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत किया गया हो। अविश्वास प्रस्ताव के लिए सूचना मिलने के बाद 10 दिन से पहले और 20 दिन के बाद सचिव बैठक नहीं बुला सकता। अदालत ने कहा कि सरपंच की यह आशंका निराधार है कि बीडीसी नियम 81 का पालन किए बिना उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। इसके साथ ही अदालत ने नियम 81 का अनुपालन करते हुए फरीदा बेगम के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विकल्प खुला छोड़ दिया।