कठुआ। अखंड परम धाम नौनाथ में संत समागम एवं हरि कथा का आयोजन जारी है। पांच दिवसीय आयोजन के चौथे दिन महामंडलेश्वर युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि परमात्मा को पाने का हर मनुष्य प्रयास करता है लेकिन इसके लिए मनुष्य के पास ब्रह्म ज्ञान होना चाहिए और इस ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति गुरु के माध्यम से ही हो सकती है। ब्रह्म ज्ञान से ही हम परमात्मा को पहचान सकते हैं।
उन्होंने कस्तूरी कुंडल बसे मृग ढूंढे वन माही का उदाहरण देते हुए कहा कि कंठ में विराजमान कस्तूरी का ज्ञान ना होने के कारण मृग जंगल में चारों ओर ढूंढता है। उसी प्रकार परमात्मा जो हमारे आस पास ही है। उसे भी हम ज्ञान न होने के कारण पहचान नहीं पाते। हम जिसकी तलाश में भटक रहे हैं उसको पहचानने की जरूरत है। इसके लिए हमें परमात्मा को जानना होगा। महामंडलेश्वर ने कहा कि भले ही हम सैकड़ों जन्म लें, मगर बिना ब्रह्म ज्ञान के हम परमात्मा से साक्षात्कार नहीं कर सकते हैं। 90 प्रतिशत लोगों को आत्मा का परोक्ष ज्ञान है। लेकिन उन्हें ब्रह्म का ज्ञान नहीं है। हमें चिंतन, मनन, ध्यान और स्वाध्याय कर ब्रह्म ज्ञान को प्राप्त करना होगा। इसी में हमारा कल्याण है।