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गुलाम नबी आजाद: दो शर्तें माने केंद्र सरकार, नौकरी जमीन न ले सकें बाहरी लोग

Tue, 10 Aug 2021 11:12 PM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

राहुल गांधी से बजट सत्र के तीन दिन के भीतर स्टेटहुड का बिल रखने का अनुरोध किया।
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गुलाम नबी आजाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद उम्मीद है कि जो उन्होंने वादे किए हैं और पांच मांगें जो हमने कांग्रेस पार्टी की ओर से रखी थी वो मान ली जाएंगी। कहा कि हम चाहते हैं कि चुनाव जल्द से जल्द होने चाहिए और पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। लेकिन शर्त यह है कि स्टेटहुड चुनाव से पहले दिया जाना चाहिए ताकि लोगों का भरोसा कायम हो सके। 

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आजाद ने कहा कि बजट सत्र जारी है और वे राहुल गांधी से गुजारिश करते हैं कि शेष बचे तीन दिन में स्टेटहुड का बिल लाएं और उसे पारित करवाएं। कांग्रेस पार्टी की बैठक में आजाद ने कहा कि स्टेटहुड का यह फैसला केंद्र सरकार, जम्मू-कश्मीर की अवाम, सभी के हित में है। इससे जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा हो जाएगा। हमें दिल्ली या पुड्डुचेरी जैसी सरकार नहीं चाहिए जहां कैबिनेट का हर फैसला एलजी के पास जाता है, जहां एलजी ही सरकार चलाते हैं।

कानून व्यवस्था की स्थिति भी वह ही देखते हैं। जम्मू-कश्मीर एक बॉर्डर स्टेट है जहां एलजी को यहां की कानून व्यवस्था पता ही नहीं चलेगी। यहां कानून व्यवस्था का 70 सालों का तजुर्बा है, जिसे यहां का मुख्यमंत्री और यहां की सरकार ही चला सकती है। आजाद ने कहा कि 35-ए में दो चीजें हमसे छीनी गईं, हमें 35ए पूरा वापस नहीं चाहिए, लेकिन दो नौकरी और जमीन पर विशेषाधिकार का हक चाहिए।
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यह रियायत पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भी है। पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तराखंड के पास भी ऐसे प्रावधान हैं। फिर जम्मू-कश्मीर से क्यों छीन लिए गए। आजाद ने कहा कि जो हालात यहां बने हैं उससे यहां की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। जम्मू में भी करीब 13000 उद्योग थे। पिछले करीब ढाई साल में 6500 उद्योग बंद हो गए हैं। यह उद्योग सब कश्मीर पर निर्भर थे।

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