फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किताब में दावा: पठानकोट एयरबेस में घुसने के लिए जैश के आतंकियों को मिली थी स्थानीय भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों से मदद

Fri, 13 Aug 2021 11:22 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दो जनवरी 2016 को, भारतीय सेना की वर्दी पहने बंदूकधारियों का एक दल भारत-पाकिस्तान के बीच पंजाब सीमा पर रावी नदी से होकर गुजरा। भारतीय सीमा में पहुंचकर इन्होंने वाहनों का अपहरण किया और पटानकोट एयररबेस की ओर बढ़ गए थे। एयरबेस पर पहुंचकर आतंकियों ने गोलीबारी शुरू की। इस दौरान भारतीय सुरक्षा बलों के तीन कर्मचारी शहीद हुए थे। भारतीय सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में चार आतंकियों को मार गिराया था। इसी दिन बाद में हुए एक आईडी धमाके में चार और भारतीय सैनिक शहीद हुए थे।
विज्ञापन
पठान कोट एयरबेस - फोटो : पीटीआई (फाइल)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक नई किताब में दावा किया गया है कि साल 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले से पहले कुछ भ्रष्ट स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने भारतीय वायुसेना के इस एयरबेस का दौरा किया था। इनमें से एक ने यहां नो सर्विलांस स्पॉट की पहचान की थी, जिसका इस्तेमाल आतंकियों ने गोला-बारूद, ग्रेनेड, मोर्टार और एके47 रायफल ढोने में किया था। यह दावा 'स्पाइ स्टोरीज: इनसाइड दि सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ दि रॉ एंड दि आईएसआई' नाम किताब में किया गया है। यह किताब दो पत्रकारों, एड्रियन लेवी और कैथी स्कॉट-क्लार्क ने लिखी है।

विज्ञापन

 
लेखकों ने किताब में कहा है कि भारतीय सुरक्षा बलों को यह सुनिश्चित करने में तीन दिन लग गए थे कि स्थिति अब नियंत्रण में वापस आ गई है। भारत ने इसके लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए युद्ध की धमकी देते हुए प्रतिक्रिया दी थी। लेखकों ने किताब में लिखा है, 'लेकिन संयुक्त खुफिया जानकारी की ओर से जारी आंतरिक रिपोर्ट गंभीर और कष्टकारी रूप से ईमानदार थी। इसने स्वीकार किया कि लगातार चेतावनियों के बावजूद सुरक्षा के कई अहम हिस्से गायब थे। पंजाब की 91 किलोमीटर से ज्यादा की सीमा पर बाड़ नहीं लगाई गई थी।'

किताब कहती है, 'कम से कम चार रिपोर्ट में यह बताया गया था कि नदियां (और सूखी खाड़ियां) असुरक्षित स्थान थीं, लेकिन उनके पार कोई जाल नहीं लगाया गया था। छह लिखित अनुरोधों के बावजूद, कोई अतिरिक्त गश्त की व्यवस्था नहीं की गई थी। निगरानी प्रौद्योगिकी और ट्रैकर को भी तैनात नहीं किया गया था।' लेखकों ने एक बीएसएफ अधिकारी के हवाले से लिखा है कि जमीन पर बल की स्थिति कमजोर थी क्योंकि इसका ध्यान कश्मीर में गतिविधियों पर केंद्रित था और अधिक जवानों की मांग अनुरोध के बाद भी पूरी नहीं हुई थी।
विज्ञापन


पठानकोट हमले को लेकर किताब कहती है कि आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद ने 350 किलो विस्फोटक का भुगतान किया था, और ये विस्फोटक भारत में खरीदे गए थे। इसमें कहा गया है, 'भ्रष्ट स्थानीय पुलिस अधिकारियों समेत आतंकियों के भारतीय सहयोगियों के एयरबेस का जायजा लेने की आशंका थी। इनमें से एक ने ऐसी जगह ढूंढ ली थी जहां फ्लडलाइट की रोशनी नहीं पहुंचती थी और यह स्थान सीसीटीवी कैमरों की पहुंच से भी बाहर था। दीवार के पास एक बड़े पेड़ के नजदीक इस स्थान पर किसी तरह का निगरानी उपकरण नहीं था।'

मामले की जांच करने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने लेखकों को बताया कि भ्रष्ट पुलिस अधिकारी या उनके किसी सहयोगी ने ऊपर चढ़कर एक रस्सी बांधी थी। आतंकियों ने इसका इस्तेमाल 50 किलो गोला-बारूद, 30 किलो ग्रेनेड, मोर्टार और एके-47 रायफल पहुंचाने में किया। इसके बाद गोला-बारूद और हथियारों से लैस आतंकियों ने वायुसेना के एयरबेस में घुस कर हमला कर दिया था। इस दौरान छह जवान और एक अधिकारी शहीद हुआ था। वहीं, भारतीय सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें