शब्द और सुर अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही नदी के दो किनारे हैं। साहित्य वह रंग है, जो सुरों के कैनवास पर भावों की आकृति उकेरता है और संगीत वह लय है, जो शब्दों के भीतर प्राण फूंककर उन्हें थिरकने पर मजबूर कर देती है। सुरों के पास यदि शब्दों का आधार न हो तो वे एक अनकही पहेली की तरह भटकते रहते हैं। एक संगीतकार जब साहित्य पढ़ता है तो उसे अपनी तान में पिरोने के लिए एक 'कहानी' मिलती है।
अमर उजाला शब्द सम्मान के सांतवें संस्करण में बुधवार को मुख्य अतिथि विख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने कई बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हम सब सुर और लय से बंधे हैं। जैसे सितार की एक 'मींड़' दो सुरों को जोड़ती है, वैसे ही एक कवि की संवेदनशीलता संगीत की बारीकियों को जोड़ती है।
यह रिश्ता किसी सितार की जुगलबंदी जैसा है, जहां एक मौन होता है तो दूसरा बोलता है, पर दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे की अनुगूंज में ही है। अमर उजाला शब्द सम्मान के मंच पर गूंजी यह बात दरअसल उस सार्वभौमिक सत्य की पुष्टि है कि कला चाहे कागज पर उतरे या तारों पर, उसकी आत्मा एक ही है।
उस्ताद शुजात हुसैन खान की विशेष प्रस्तुति
समारोह में विख्यात सितार वादक उस्ताद शुजात हुसैन खान ने विशेष प्रस्तुति दी। सितार की गूंज और तबले की थाप पर दर्शक भाव विभोर हो उठे। प्रस्तुतियां इतनी अनूठी रहीं कि एक घंटे से ज्यादा समय के कार्यक्रम में दर्शक मंत्र-मुग्ध रहे। समारोह के दौरान नई दिल्ली के जनपथ स्थित आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर का भीम सभागार पूरी तरह भरा रहा।
ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी को आकाशदीप
सुर और शब्दों की इस शाम में उस्ताद शुजात हुसैन खान ने हिंदी की प्रख्यात रचनाकार ममता कालिया और मणिपुरी की विख्यात साहित्यकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को सर्वोच्च आकाशदीप अलंकरण से सम्मानित किया।
इन्हें मिला श्रेष्ठ कृति सम्मान
श्रेष्ठ कृति सम्मान में अलग-अलग साहित्यिक विधाओं के रचनाकारों को सम्मानित किया गया। छाप-कथा श्रेणी में शहादत को, छाप-कविता में सविता सिंह को और छाप-कथेतर में नाइश हसन को सम्मान मिला। भाषा सेतु और अनुवाद क्षेत्र के लिए सुजाता शिवेन को भाषाबंधु सम्मान दिया गया। नई प्रतिभा को बढ़ावा देने के तहत पहली कृति के लिए मनीष यादव को ‘थाप’ सम्मान प्रदान किया गया।
नाइश हसन, सुजाता शिवेन, सविता सिंह, शहादत और मनीष यादव
शब्दों की संस्कृति को मिला बल- राजुल माहेश्वरी
अमर उजाला समूह के चेयरमैन राजुल माहेश्वरी ने कहा कि शब्द साधकों के सम्मान समारोह में सुधी श्रोताओं-दर्शकों और साहित्य प्रेमियों की भागीदारी व मौजूदगी से इस आयोजन को गरिमा मिलती है। इससे हर साल कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है।
माहेश्वरी ने उस्ताद शुजात हुसैन, ममता कालिया और अरमबम ओंगबी मेमचौबी का आभार जताते हुए कहा, इन हस्तियों ने इस शाम को यादगार बना दिया। आज के अलंकरण समारोह में इन्होंने जिस सभ्यता के साथ हिस्सा लिया, उससे शब्दों की संस्कृति के प्रति अमर उजाला के संकल्प को बल मिला है।
सूरज की चुराई किरण- यशवंत व्यास
अमर उजाला के समूह सलाहकार यशवंत व्यास ने कहा कि यह अमर उजाला शब्द सम्मान की सातवीं कड़ी है, सूरज का सातवां घोड़ा। कई बार ऐसा लगता है कि हम लोग सूरज की किरण को कहीं अपने तरीके से चुरा के अपने भीतर के खजाने में रख लेते है।
जब भी उसे ऊष्मा की जरूरत होती है, वह उसी किरण को उठाता है और अपनी जिंदगी को ऊर्जावान बना देता है। इस शाम में जब शुजात साहब बैठे हैं, तो लगता है जैसे, पर्वत पैरों को नदियों में डाल के बैठे हैं और पैर हिला रहे हैं। हवाएं कंघियों की तरह बार-बार संगीत बजा रहीं हों, पेड़ों के ऊपर।
बेहतर समाज की रचना करे- ममता कालिया
ममता कालिया ने कहा कि साहित्य से परिवर्तन बहुत धीमे-धीमे आता है। इसका परिवर्तन और असर उस तरीके से नहीं देख सकते, जैसे दवाओं का असर होता है। साहित्य में बुखार ठीक करने के लिए कई सदियां लग जाती हैं। साहित्यकार का प्रयत्न यही रहता है कि वह किसी तरीके से एक बेहतर समाज की रचना करे।
पुरस्कार ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी- मेमचौबी
अरमबम ओंगबी मेमचौबी ने कहा शांत स्वर, स्पष्ट विचार और असहमति से न घबराने वाला लेखन ही समाज को बेहतर बना सकता है। इस पुरस्कार ने मेरी जिम्मेदारी बढ़ा दी है। कभी यह सपना नहीं देखा था कि मैं लेखिका बनूंगी। मैंने महिलाओं के इतिहास, उनके संघर्षों, चुनौतियों और उपलब्धियों पर लिखना शुरू किया।