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एक पेड़ पर 20 लोगों को दे रहा ऑक्सीजन, जिले को चाहिए चार लाख पौधे

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पानीपत। पानीपत प्रदेश में तीसरे नंबर पर सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में है। यहां चल रहीं करीब 30 हजार छोटी-बड़ी फैक्टरियां और 80 हजार हर रोज चलने वाले वाहन शहर को प्रदूषित कर रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव व्यक्ति की स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इन 30 हजार फैक्टरियों में 10 हजार ही रजिस्टर्ड हैं, बाकी 13 हजारी बिना लाइसेंस के ही चलाई जा रही हैं। यही का कारण है पानीपत में लगभग 23 हजार दमा, 13 हजार टीबी व एक हजार लोग कैंसर से पीड़ित हैं। प्रदूषण से निजात दिलाने और सृष्टि का आधार माने जाने वाले पेड़ पौधों की संख्या यहां बहुत कम है। 1,268 वर्ग किलोमीटर में बसे पानीपत शहर में वन्य क्षेत्र यहां के क्षेत्रफल का महज एक प्रतिशत है।
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पानीपत की जनसंख्या 14 लाख है। साढ़े छह लाख लोग शहर में रहते हैं, जबकि साढ़े सात लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। इस हिसाब से कम से कम डेढ़ लाख पेड़-पौधे शहरी क्षेत्र में होने चाहिए और ढाई लाख पौधे ग्रामीण क्षेत्रों में होने चाहिए। एक पेड़ 4-6 लोगों को ऑक्सीजन दे सकता है। जिले में लगभग 70 हजार पेड़ हैं। एक पेड़ को 20 लोगों को ऑक्सीजन देनी पड़ रही है। वन विभाग पौधे लगाने के बाद उन्हें उनके हाल में छोड़ देता है। कुछ दिनों बाद वे पौधे मर जाते हैं। विभाग कागजों में हर साल 20 हजार पौधे लगाता है लेकिन इनमें से महज पांच प्रतिशत पौधे ही पल पाते हैं। इसका बड़ा कारण देखभाल का अभाव है। प्रशासन ने 2016 में जिले में छह लाख पौधे लगाने का टारगेट रखा था, लेकिन दो माह में ही ये अभियान दम तोड़ गया था।
फसल अवशेष और फैक्टरियों का धुआं प्रमुख कारण
प्रदूषण के मामले में हरियाणा देश के अन्य शहरों में जहां सबसे आगे की तरफ खड़ा दिख रहा है। इसके प्रमुख कारण फसल और फैक्टरियां हैं। अप्रैल में गेहूं का सीजन था और इस दौरान हजारों एकड़ फसल बिजली और अन्य कारणों से जल गई। वहीं अवशेष जलने के भी काफी मामले सामने आए हैं। इसके धुएं से हवा में पीएम 2.5 बढ़ा है। वहीं हरियाणा के शहर फरीदाबाद और पानीपत में फैक्टरियां काफी ज्यादा हैं, जहां घटिया स्तर का ईंधन प्रयोग होता है और इसका धुआं भी एक अहम कारण है।
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पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी की खास नजर है। पिछले तहन साल से केंद्र की ये टीमें पानीपत में लगाकर छापेमारी कर रही हैं। तीन साल में 50 फैक्टरियों को बंद करने और 140 फैक्टरियों को पर्यावरण के लिए खतरा मानते हुए उन्हें नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
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