इसराना। सरकार की ओर से हरिद्वार से कांवड़ लाने पर लगाई गई पाबंदी के बाद किसानों ने किसान डाक कांवड़ यात्रा का रुख दिल्ली बॉर्डरों की ओर कर लिया है। गांव नौल्था से शुक्रवार को किसान डाक कांवड़ लेकर युवा सिंघु बॉर्डर की ओर रवाना हो गए। युवाओं ने कांवड़ लेकर उन बॉर्डरों का रुख किया है, जहां पर आठ माह से तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने और एमएसपी गारंटी कानून बनाने के मांग को लेकर किसान बैठे हुए हैं।
शुक्रवार को नौल्था के बाबा लाठे वाले मंदिर से किसान कांवड़ यात्रा सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हुई। यात्रा की अगुवाई युवा किसान नेता मनोज नौल्था ने की। यात्रा को भाकियू के जिला महासचिव हरिंदर राणा, प्रवक्ता प्रदीप जागलान व संगठन सचिव अजमेर कुहाड़ ने रवाना किया। इस दौरान जिला महासचिव हरिंदर राणा ने कहा कि भले सरकार ने हरिद्वार की कांवड़ यात्रा पर पाबंदी लगाई दी हो, लेकिन दिल्ली के बॉर्डर अब किसानों के धाम बन चुके हैं। अपने खेत की मिट्टी और पानी लेकर युवाओं के जत्थे किसान डाक कांवड़ यात्रा के रूप में लगातार बॉर्डरों पर जा रहे हैं।
जिला प्रवक्ता प्रदीप जागलान ने कहा कि सरकार इस भ्रम में नहीं रहे कि किसान थककर लौट जाएंगे। किसान तब तक नहीं लौटेंगे जब तक तीनों कृषि कानून रद्द नहीं किए जाते। इस दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। रवाना होने वाले जत्थे में मनोज नौल्था, जितेंद्र जागलान, हरेंद्र जागलान, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, राजकुमार, लाला राम, संदीप जौंधन, रविंद्र जौंधन और दीपक जौंधन शामिल रहे।
समालखा। कृषि कानूनों के खिलाफ किसान लगातार आंदोलनरत हैं। शुक्रवार को समालखा क्षेत्र के विभिन्न गावों एवं शहरी क्षेत्र से किसान खेतों की मिट्टी और हरिद्वार से जल लेकर सिंघु बार्डर के लिए रवाना हुए। इससे पहले किसान जौरासी के पुरातन शिव मंदिर में एकत्रित हुए और वहां से समालखा स्टेशन पर पहुंचे। जत्थे का नेतृत्व में परविंद्र जौरासी और जगतार सिंह बिल्ला ने किया। उन्होंने कहा कि किसान किसी भी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है। अगर भाजपा तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर देती है तो उसक भी समर्थन किया जाएगा। आंदोलन समाप्त होने तक किसान बार्डर पर डटे रहेंगे। इस अवसर पर रोहित, गुरविंद्र, जिम्मी, बिंद्र बिहौली, दलबीर सिंह, कमल जौरासी, प्रवीन बाल्यान, काला आदि मौजूद रहे।