लोकल ऑडिट विभाग हरियाणा ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल हरियाणा का ऑडिट करके काउंसिल के पूर्व चेयरमैन और सदस्यों पर 66 लाख रुपये की रिकवरी निकाली है। पिछले दो माह में ऑडिट विभाग ने काउंसिल के एक-एक खाते की जांच की, जिसमें सामने आया कि पूर्व चेयरमैन समेत अन्य सदस्यों ने काउंसिल से लाखों रुपये टीए/डीए एवं अन्य सामान खर्च के लिए थे। पहले चेक के जरिए पैसा लिया और बाद में कैश भी ले लिया। अब यह राशि वापस काउंसिल के खातों में जमा करवानी होगा।
लोकल ऑडिट विभाग के डायरेक्टर कार्यालय से मिली रिपोर्ट के अनुसार पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र शर्मा ने 8 अगस्त 2008 से 31 मई 2014 तक एडवांस पेमेंट के तौर पर करीब 8 लाख 94 हजार 495 रुपये लिए थे और 1 लाख 19 हजार 195 रुपये उनके पास काउंसिल का कैश है। सुरेंद्र शर्मा ने रोहतक में एक कार्यालय खोलकर वहां करीब 4 लाख 44 हजार रुपये खर्च किए थे, जिसे विभाग ने फिजूल खर्च मानते हुए रिकवरी करने को कहा है।
इसके अलावा टीए/डीए के नाम पर लिए गए 1 लाख 95 हजार 650 रुपये की रिकवरी दिखाई है। काउंसिल में सामान खरीदने के लिए किसी तरह की कोटेशन ना लेने के बावजूद सामान खरीदने पर 7,80,249 रुपये बिना चैक के 1,53,122 रुपये निकलाने की भी रिकवरी की बात कही गई है।
ऑडिट में सामने आया कि बिना रसीद के करीब 12 लाख 53 हजार रुपये की पेमेंट कर दी गई है। पूर्व रजिस्ट्रार अशोक नागपाल की तरह 1 लाख एक हजार 120 रुपये और पूर्व रजिस्ट्रार और पूर्व सदस्य डीपी लोचन की तरफ 3 लाख 12 हजार रुपये की रिकवरी निकाली गई है।
काउंसिल में किसी प्रकार का एकाउंट सलाहकार रखने का पद नहीं है, लेकिन फिर भी राजेश गुलाटी को वित्तीय सलाहकार नियुक्त किया गया। ऐसी स्थिति में ऑडिट विभाग ने राजेश गुलाटी पर 9 लाख 55 हजार 630 रुपये की रिकवरी दिखाई है।
ऑडिट में कई पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों पर भी रिकवरी करने के लिए कहा गया है। रिपोर्ट में कृष्ण कुमार पर 82 हजार 700, राजकुमार वर्मा पर 58,980 रुपये, सोहन लाल कांसल पर 32 हजार 100 रुपये, गुरचरण पर 10 हजार रुपये, विजय ढींगरा पर 39,700 रुपये, अमित नागपाल पर 5550 रुपये, राकेश दहिया पर 14 हजार 700 रुपये, पंकज कुमार 4050 रुपये, जयप्रकाश पर 3400 रुपये, यशपाल सिंगला पर 13 हजार 450 रुपये की रिकवरी दिखाई गई है। राज्य फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन केसी गोयल ने कहा कि ऑडिट विभाग की ओर से उन्हें रिपोर्ट की एक कॉपी दी गई है। जिसमें लगभग 66 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी करने के लिए कहा गया है।