दरअसल, आगामी 22 जुलाई से तीन अगस्त कर कांवड़ यात्रा चलेगी। कांवड़िया उतराखंड के हरिद्वार से चल लेकर अपने मंदिरों पर पहुंचेंगे। पलवल जिला यूपी व राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है, इसलिए यहां से कई राज्यों के कावंडिया गुजरते हैं। जिला पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने बताया कि कावंडियों को सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिला में 22 नाकों के अलावा तीन इंटरेस्टेट नाका लगाए जाएंगे। सभी मार्गों पर पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाने के साथ ही मुख्य चौक चौराहों पर बेरिकेटींग करवाई जाएगी। जिला पलवल के अंतर्गत आने वाले गदपुरी व करमन टोल प्लाजा पर दो-दो लाइन कावड़ियों के लिए खुला रखा जाएगा। इसके अलावा 13 पीसीआर व 24 राइडर 24 घंटे के लिए तैनात रहेंगी। साथ ही फायर बिग्रेड, क्रेन व एंबुलेंस की व्यवस्था भी अलग से कराई गई है।
शोर-शराबा व यातायात बाधित करने वालों पर होगी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन ने कहा कि कावड़ यात्रा के दौरान डीजे रहित वाहन इस्तेमाल किए जाएं। अवहेलना पर उन्हें जप्त कर वाहन मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सड़क के बीच में बेसबॉल का डंडा व हॉकी लेकर चलने वालों, नशा करने और शोर मचाने वालों पर पुलिस विशेष ध्यान रखेगी। संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस का भ्रमण रहेगा। कोई भी दुर्घटना न हो, इसके लिए नदी, नहर, सड़कों पर साइन बोर्ड लगाए जाएंगे। स्पीड लिमिट साइन भी लगाए जाएंगे। कांवडियों से अपील है कि अपना पहचान पत्र साथ लेकर जाएं। ध्वनि प्रदूषण के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए निर्देशों की पालना करें।
कांवड़ शिविर लगाने के लिए लेनी होगी एसडीएम की अनुमति
जिला उपायुक्त नेहा सिंह ने जिला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित एसडीएम की अनुमति के बिना कांवड़ शिविर लगाने पर रोक लगाई है। निर्देशों के तहत जिला क्षेत्र में कांवड़ शिविर लगाने के लिए संबंधित एसडीएम की अनुमति लेनी अनिवार्य है। इसके लिए संबंधित एसडीएम कार्यालय में अपना पंजीकरण करवाना होगा। कांवड़ शिविरों के बीच में कम से कम दो किलोमीटर की दूरी होनी जरूरी है। कांवड़ शिविर को दिल्ली-मथुरा सडक़ मार्ग पर बाएं तरफ ही स्थापित किए जाएं। सड़क मार्ग से कम से कम 100 फुट की दूरी पर ही शिविर स्थापित होने चाहिए। कांवड शिविर में महिला व पुरूष यात्रियों अथवा श्रद्धालुओं के ठहरने व शौचालय की अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए। शिविरों में लाउड स्पीकर ऊंची ध्वनि में न बजें। असंवैधानिक भाषा, शब्द, गाने का प्रचार-प्रसार न चलाया जाए। लाउडस्पीकर को धीमी आवाज में समय सीमा प्रात: छह बजे से रात्रि 10 बजे तक चलाने की अनुमति दी जाएगी।