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कैथल को दूध व दूध से बने उत्पादों के लिए लगाए जा सकते हैं प्रोसेसिंग युनि

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जिले में दूध व दूध से बनने वाले उत्पादों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर विचार चल रहा है। सरकार की प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज (पीएम-एफएमई) योजना के लिए जिले का चयन किया गया है। मंगलवार को इस योजना के तहत गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक में डीसी प्रदीप दहिया ने यह जानकारी दी। योजना के अब तक 52 आवेदन आ चुके हैं, जिसमें से 8 आवेदनों को मंजूरी देने के बाद लोन देने के लिए बैंक के पास भेज दिया गया है।
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इस योजना में एक जिला-एक उत्पाद के तहत कैथल को दूध व दूध से बने उत्पादों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में प्रधानमंत्री फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इंटरप्राइजेज योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा लोग दूध व दूध से बने उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए संबंधित विभाग द्वारा प्रेरित किया जाएगा। इन्हीं उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ उनका उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को न केवल विशेष प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने के से लेकर उसे ब्रांड बनाकर बाजार तक में उतारा जाएगा।
इसके अतिरिक्त असंगठित क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण में काम कर रहे सूक्ष्म उद्यम जैसे आम, आलू, लीची, टमाटर, साबूदाना, किन्नू, भुजिया, पेठा, पापड़, अचार, मोटे अनाज आधारित उत्पाद, मत्स्य / पॉल्ट्री उत्पाद तथा पशुचारा इत्यादि के लिए भी लाभ लेने के पात्र होंगे।
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जिला एमएसएमई केंद्र के उपनिदेशक जनक कुमार ने कहा कि जो लोग अपनी प्रोसेसिंग यूनिट या अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो वे इसके लिए कुल लागत का 35 प्रतिशत अनुदान के तौर पर ले सकते हैं। इसमें अधिकतम हिस्सा प्रति यूनिट 10 लाख रुपये है। यह योजना साल 2020-21 से वर्ष 2024-25 तक पांच वर्षों के लिए है। यह जानकारी डीसी प्रदीप यादव ने दी। इस अवसर पर डीडीपीओ जसविंद्र सिंह, जिला बागवानी अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार, एलडीएम विनोद कुमार एवं अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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