सिर पर मटके लेकर डीसी कार्यालय में जाती महिलाएं।
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नगूरां गांव की एक बस्ती में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जनस्वास्थ्य विभाग ने एक साल पहले पूरे गांव में घर-घर पेयजल के लिए कनेक्शन कर दिए, लेकिन उनकी बस्ती के करीब 300 घरों को छोड़ दिया। इससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है। जिसको लेकर जंगला मोहल्ला की महिलाएं सिर पर मटके उठा कर डीसी कार्यालय पहुंचीं। महिलाएं नारे लगाते हुए लघु सचिवालय में प्रवेश कर गई। जैसे ही प्रशासन की खुफिया व सुरक्षा शाखा को इसकी भनक लगी, यह लोग मौके पर पहुंचे और डीसी कार्यालय की सीढ़ियों से ही बातचीत के लिए महिलाओं को वापस ले आए। इसके बाद इनकी मुलाकात जींद के एसडीएम दलबीर सिंह से करवाई गई। एसडीएम ने उचाना के एसडीएम डॉ. राजेश खोथ को पूरा मामला बताया। उन्होंने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे नगूरां गांव निवासी निर्मला, मंजू, राजबीर, पूनम, सत्यवीर, काली, नीता, प्रवीण ने बताया कि उनके साथ वाली गली में भी पेयजल के कनेक्शन कर दिए गए हैं, लेकिन उनके मोहल्ले को छोड़ दिया। महिलाओं ने कहा कि इसके चलते उन्हें गांव के बाहर से सिर पर पानी ढोना पड़ता है। कई बार पड़ोस में लगी जनस्वास्थ्य विभाग की लाइन से भी पानी लाते हैं, लेकिन पड़ोसी पानी नहीं भरने देते। ऐसे में इन लोगों ने मांग की कि पूरे गांव की तरह ही उनको भी पेयजल मिले।
कई बाद दी है शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार अधिकारियों को शिकायत दी है। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन एक साल से यह लोग चक्कर कटवा रहे हैं।
इन लोगों ने कहा कि पेयजल योजना के तहत उनके घरों में पीने के पानी के कनेक्शन नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद उनको पेयजल के बिल भेजे जा रहे हैं। इससे लोगों को दोहरी परेशानी हो रही है।
हां पेयजल को लेकर नगूरां गांव के लोग आए थे। मुझे किसी दूसरी मीटिंग में जाना था। ऐसे में ग्रामीणों की मुलाकात जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से करवा दी और उचाना के एसडीएम को मामले की जानकारी दे दी गई है। उन्होंने समस्या का समाधान करवाने की बात कही है।
दलबीर सिंह, एसडीएम, जींद।