आरोपी राजेंद्र सिंह व शहाना की फाइल फोटो।
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गोरखपुर जिला महिला अस्पताल की संविदाकर्मी शहाना उर्फ सुहानी की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार दरोगा राजेंद्र सिंह को जेल में अपने घरवालों की याद सता रही है। हालांकि गिरफ्तारी के महीने भर बाद भी परिजन उनकी खोज खबर लेने नहीं आए। वहीं इस मामले में पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस केस दर्ज करने के बाद मामले को भूल ही गई है। यहां तक कि अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी नहीं दी गई है।
भीटी गांव निवासी शहाना उर्फ सुहानी कोतवाली इलाके में बक्शीपुर में किराए के मकान में रहती थी। बीते 15 अक्तूबर को कमरे में फंदे से लटकता उसका शव मिला था। इस मामले में शहाना की मां और बहन ने बगल के कमरे में रहने वाले दरोगा राजेंद्र सिंह पर ही हत्या का आरोप लगाया था।
कोतवाली पुलिस ने दरोगा राजेंद्र सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में केस दर्ज कर कोर्ट से जेल भेज दिया था। शहाना के घरवालों ने बताया कि था दरोगा भी उसी के साथ रहते थे। 18 अक्तूबर को राजेंद्र सिंह जेल भेज दिए गए थे।
जेल जाने के बाद से ही दरोगा को अपने परिजनों की याद सताने लगी थी। हलांकि महीने भर बाद भी उनके घर से कोई मिलने नहीं आया। उधर, शहाना के घरवालों का आरोप है कि पुलिस इस मामले को लटकाए हुए है। केस दर्ज करने और गिरफ्तारी के बाद से ही पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। यहां तक कि परिजनों को अब तक शहाना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं मिली है। शहाना की बड़ी बहन सब्बो का कहना है कि वह परिवार के साथ कोतवाली भी गई थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।