यदि किसी ने आवंटी के खिलाफ दुकान किराए पर देने की शिकायत की तो आवंटी खुद को ही दुकान का मालिक बताते हुए नगर निगम पहुंच जाते हैं। खुद की दुकान बताकर थोड़ा सुधार कार्य करवाने के लिए बंद किए रहने की बात बोलते हैं। जबकि, बिना नगर निगम की अनुमति कोई भी सुधार कार्य नहीं कराया जा सकता है।
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क्या होता है सिकमी किराएदार
आय के स्रोत विकसित करने के मकसद से नगर निगम शहर के विभिन्न इलाकों में अपनी दुकानें बनवाता है। इसके बाद इन दुकानों को आवंटित करता है। इनसे निगम ही किराया वसूलता है। मगर यही आवंटी खुद दुकान न चलाकर दूसरों को किराए पर दे देते हैं। इनसे मूल आवंटी दुकानों का मनचाहा किराया वसूल करता है। ऐसे लोगों को सिकमी किराएदार कहते हैं।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि नगर निगम अपनी दुकानों से अर्जित धन से भी कोष बढ़ाएगा। नगर निगम अपनी दुकानों की निगरानी और जांच भी कराएगा। मूल आवंटियों से इतर कोई अन्य दुकानों को संचालित करते हुए मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्यकारिणी की बैठक में भी सदस्यों ने इन दुकानों को लेकर अपनी बातें रखी थीं।