डीयू के मुताबिक, विश्वविद्यालय छात्रों को उत्पाद तैयार करने का मौका दे रहा है। इसके लिए डीयू के डिजाइन इनोवेशन सेंटर को जिम्मेदारी दी गई है। छात्र डीयू की डिजाइन इनोवेशन सेंटर की वेबसाइट पर पहुंचकर जानकारी लेने के साथ आवेदन कर सकते हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) का डिजाइन इनोवेशन सेंटर विद्यार्थियों के स्टार्टअप विचारों को उड़ान देगा। इसके लिए सेंटर की ओर से छात्रों से आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि सात जुलाई है। विश्वविद्यालय के सहयोग से विद्यार्थी अपने उत्पाद को तैयार कर सकेंगे। इसमें डीयू के शिक्षक भी छात्रों के साथ उनके विचारों पर काम करेंगे।
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डीयू के मुताबिक, विश्वविद्यालय छात्रों को उत्पाद तैयार करने का मौका दे रहा है। इसके लिए डीयू के डिजाइन इनोवेशन सेंटर को जिम्मेदारी दी गई है। छात्र डीयू की डिजाइन इनोवेशन सेंटर की वेबसाइट पर पहुंचकर जानकारी लेने के साथ आवेदन कर सकते हैं। इससे उन छात्रों को बढ़ावा मिलेगा, जिनके पास तकनीकी दक्षता है, लेकिन स्टार्टअप के लिए सहयोग की जरूरत महसूस कर रहे हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन व्यवस्था करेगा।
समाज से जुड़े विचारों को दी जाएगी तवज्जों
विश्वविद्यालय के मुताबिक, स्टार्टअप के लिए ऐसे छात्रों को तवज्जों दी जाएगी, जिनके विचार समाज से जुड़े रहेंगे। इन विचारों में से विश्वविद्यालय बेहतर विचारों का चयन करेगा व विचारों को बढ़ावा देेने के लिए अपने संसाधनों का इस्तेमाल करेगा। छात्रों के विचारों और विश्वविद्यालय के सहयोग से स्टार्टअप के तहत ऐसे उत्पाद तैयार हो सकेंगे, जिनके माध्यम से समाज से जुड़ी परेशानियों का हल हो सके।
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छह महीने का प्रशिक्षण देेगा विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय के मुताबिक, स्टार्टअप उत्पाद तैयार करने के लिए छात्रों को 6 माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवधि को तीन-तीन माह के तहत दो चरणों में विभाजित किया गया है। इन छह महीने में विश्वविद्यालयों छात्रों को जगह देने के साथ मेंटरिंग के लिए शिक्षक भी उपलब्ध करवाएगा। बकायदा विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किए गए माहौल के बीच छात्र विशेषज्ञों के माध्यम से अपने विचारों को धार दे सकेंगे। इसके लिए छात्रों को विश्वविद्यालय को किसी प्रकार का भुगतान भी नहीं करना होगा।
विश्वविद्यालय से नहीं मिलेगा मेहनताना या आर्थिक मदद
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय के साथ स्टार्टअप विचार पर काम करने के दौरान किसी प्रकार का मेहनताना या आर्थिक मदद नहीं मिलेगी। छात्रों को अपने खर्चे पर ही अपने उत्पादों को तैयार करने के लिए राशि का वहन करना होगा। हालांकि, छात्र राशि को व्यवस्थित रूप से खर्च करने को लेकर विश्वविद्यालय के मेंटरों से सुझाव ले सकते हैं, जिससे कम से कम लागत में उत्पाद तैयार हो सके।