उत्तर प्रदेश के बाद अब दिल्ली में भी स्क्रब टायफस बुखार के मामले सामने आए हैं। दो अस्पतालों में भर्ती हुए बच्चों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें एक बच्चे को चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और दूसरा आकाश अस्पताल में भर्ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी के लक्षण डेंगू से मिलते जुलते होते हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में इस बीमारी को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
अस्पताल के बाल रोग विभाग के डॉ मीना. जे. के मुताबिक, अस्पताल में बुखार की शिकायत के बाद भर्ती हुए छह साल के बच्चे में स्क्रब टायफस बुखार की पुष्टि हुई थी। हालांकि उसके लक्षण हल्के थे। निर्धारित उपचार के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी गई। डॉक्टर के मुताबिक, अगर समय रहते इस बीमारी में निर्धारित उपचार नहीं मिलता तो बच्चे की मौत भी हो सकती है। स्क्रब टायफस में मृत्यु दर 50 फीसदी तक होती है।
चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के डॉक्टर के मुताबिक स्क्रब टायफस से पीड़ित एक बच्चा अस्पताल में भर्ती किया गया। निर्धारित प्रोटोकॉल के हिसाब से उसका इलाज किया जा रहा है। डॉक्टर ने कहा कि इस समय कई सारी मौसमी बीमारियां बच्चों और युवाओं को हो रही हैं। वायरल, डेंगू ,मलेरिया टाइफाइड के बाद यह स्क्रब टायफस का पहला मामला आया है। यह संक्रमण काफी खतरनाक होता है। समय के साथ यह गुर्दे, लीवर, पाचन से जुड़े अन्य अंगों को भी प्रभावित करना शुरू कर देता है। कई मामलों में कई अंग काम करना बंद कर सकते हैं।
स्क्रब टायफस कैसे होता है
यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) के अनुसार स्क्रब टायफस एक बीमारी है जो बैक्टीरिया के कारण होती है। लोगों में यह संक्रमित लार्वा माइट्स के काटने से फैलता है। इसे बुश टायफस के नाम से भी जाना जाता है। पीएसआरआई अस्पताल की डॉक्टर विनीता टंडन के मुताबिक, माइट्स के काटने के एक सप्ताह से 10 दिन के भीतर इस बीमारी के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं।
क्या हैं स्क्रब टायफस के लक्षण
इसके लक्षणों में बुखार और ठंड लगना शामिल है। इसके बाद सिरदर्द, शरीर में दर्द और मांसपेशियों में दर्द होता है जैसा कि कोविड के मामले में होता है। कुछ रोगियों में जोड़ों में दर्द भी होता है, जो चिकनगुनिया का लक्षण है।