राज्य विधि आयोग के प्रस्ताव के मुताबिक, एक बच्चे की नीति अपनाने वाले माता-पिता को कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। अगर परिवार के अभिभावक सरकारी नौकरी कर रहे हैं और नसबंदी कराते हैं तो उन्हें इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सरकारी आवासीय योजनाओं में छूट जैसी कई सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
दो बच्चों वाले माता-पिता अगर सरकारी नौकरी नहीं करते हैं तो उन्हें बिजली-पानी, हाउस टैक्स, होम लोन में छूट समेत कई अन्य सुविधाएं देने का प्रस्ताव है। एक बच्चे और खुद नसबंदी कराने वाले दंपती को संतान के 20 वर्ष के होने तक मुफ्त इलाज, शिक्षा, बीमा शिक्षण संस्था व सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है।
आपको बता दें कि राज्य विधि आयोग ने इस मसौदे पर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं हैं। 19 जुलाई तक आयोग को ई-मेल (statelawcommission2018@gmail.com) या फिर डाक के जरिए सुझाव और आपत्तियां भेजी जा सकती हैं।
राज्य विधि आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति एएन मित्तल के दिशा-निर्देशन में यह मसौदा तैयार हुआ है। आपत्तियों एवं सुझावों के अध्ययन के बाद संशोधित मसौदा तैयार करके आयोग यूपी सरकार को सौंपेगा। योगी सरकार इस फॉर्मूले को ग्रीन सिग्नल देती है तो फिर यूपी में जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में यह बड़ा कदम होगा।राज्य विधि आयोग की वेबसाइट
upslc.upsdc.gov.in पर यह मसौदा अपलोड है।
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यूपी विधि आयोग के अध्यक्ष आदित्य नाथ मित्तल ने कहा कि राज्य विधि आयोग ने जनसंख्या नियंत्रण और कल्याण के लिए एक प्रस्ताव दिया है। हमने प्रस्ताव दिया है कि कोई भी दंपती जो दो बच्चों वाली नीति का पालन करता है, उसे सभी सरकारी लाभ दिए जाएंगे। वे सभी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई इस नीति का पालन नहीं करता है, तो वे ऐसी योजनाओं के लिए पात्र नहीं होंगे। उनका राशन कार्ड चार इकाइयों तक सीमित रहेगा, वे सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे और यदि वे पहले से ही सरकारी कर्मचारी हैं, तो उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी।
यूपी विधि आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रणाली स्वैच्छिक होगी, यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपने परिवार के सदस्यों की संख्या सीमित रखता है, तो वे सरकारी योजनाओं के लिए पात्र होंगे। हम इसे अगस्त के दूसरे सप्ताह तक पेश करने की योजना बना रहे हैं।