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यहां अस्पताल ही बीमार है!: न मिला स्ट्रैचर, न मिली व्हील चेयर; दादी को गोद में उठाकर दर-दर भटकता रहा पोता

Fri, 15 Mar 2024 07:06 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल

सार

कहने को तो हरियाणा का पलवल का सरकारी अस्पताल जिले का सबसे बड़ा जिला नागरिक अस्पताल कहलाता है। लेकिन सुविधाओं की तरफ देखें तो यह किसी मामूली से नर्सिंग होम के बराबर भी नहीं है।
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दादी को गोद में लेकर भटकता रहा पोता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भैया अस्पताल में व्हील चेयर या स्ट्रेचर नहीं हैं क्या? हमें अपने दादी को हड्डी वाले डॉक्टर को दिखाने ले जाना है। उन पर चला नहीं जा रहा है। काफी देर से गाड़ी में लेटी हुई हैं। देखो यहां न तो स्ट्रेचर है और न ही व्हील चेयर है। यदि डॉक्टर को दिखाना है तो कंधों पर उठाओ और डॉक्टर के पास ले जाओ, क्योंकि यहां नर्सिंग स्टाफ भी नहीं है। इतना सुनते ही बुजुर्ग महिला को अस्पताल लेकर आए परिजनों में रोष बढ़ गया। उन्होंने पहले तो स्वास्थ्य कर्मियों को खरी खोटी सुनाई। लोगों का गुस्सा देकर स्वास्थ्य कर्मी वहां से निकल लिए। बाद में परिजनों ने बुजुर्ग महिला को गोद में उठाया और डॉक्टर के पास ले गए। ऐसी समस्या इस जिला नागरिक अस्पताल में पहली बार नहीं है। हर दिन यहां इस तरह की परेशानी लोगों को झेलनी पड़ती है, लेकिन उसका असर स्वास्थ्य विभाग पर नहीं दिखाई देता है।

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कहने को तो हरियाणा का पलवल का सरकारी अस्पताल जिले का सबसे बड़ा जिला नागरिक अस्पताल कहलाता है। लेकिन सुविधाओं की तरफ देखें तो यह किसी मामूली से नर्सिंग होम के बराबर भी नहीं है। जिला नागरिक अस्पताल में कभी मरीजों को दवाइयां नहीं मिलती तो कभी उनके एक्सरा व अल्ट्रासाउंड नहीं होते। कभी रक्त व अन्य जांच नहीं होती। ऐसे में यहां उपचार के लिए आने वाले मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार तो मजबूरी में मरीजों को बाहर निजी नर्सिंग होम पर जाकर इलाज कराना पड़ता है।

ऐसा ही नजारा शुक्रवार को अस्पताल में देखने को मिला, जब एक बुजुर्ग महिला को अस्पताल के अंदर तक ले जाने के लिए परिजनों को न तो व्हील चेयर मिली और न ही कोई स्ट्रेचर मिला। मजबूरी में परिजन गोद में उठाकर बुजुर्ग महिला को अस्पताल में कभी डॉक्टर के पास तो कभी एक्सा रूम में तो कभी जांच कराने के लिए भागते फिरते रहे, लेकिन यह समस्या न तो अस्पताल प्रबंधन को दिखाई दी और न ही किसी स्वास्थ्य कर्मी व चिकित्सक को। इस बात पर परिजनों ने हलका फुलका हंगामा भी किया। डॉक्टर से भी शिकायत की, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।

गांव भुलवाना निवासी खेमचंद ने बताया कि उनकी दादी का कुल्हा टूट गया है। उन्हें दिखाने के लिए अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन जिला नागरिक अस्पताल होने के बावजूद कोई सुविधा नहीं मिली। खुद गोद में उठाकर भागना पड़ता है। इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
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मेरे संज्ञान में मामला नहीं आया है। मैं पता करता हूं। अस्पताल में व्हील चेयर व स्ट्रैचर हैं। पता करूंगा कि वे कहां रखे हुए हैं। मरीजों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इस संदर्भ में उचित कार्रवाई भी की जाएगी। -डॉ. सुरेश वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी
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