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यूक्रेन संकट: आसमान में धुंआ सड़क पर सेना, पब्लिक बंकर में, धोखे में रहे भारतीय छात्र

Sat, 26 Feb 2022 05:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

साल 2017 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश जारी करते हुए विदेश या फिर स्वदेश कहीं से भी एमबीबीएस करने पर नेक्सट परीक्षा अनिवार्य की है। साथ ही विदेश या स्वदेशी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले सभी के लिए नीट परीक्षा अनिवार्य है।
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बंकर में शरण लिए छात्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरा नाम डॉ. जितेंद्र बहल है। मेरा परिवार दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में रहता है। दो दिन पहले तक मेरा कॉलेज प्रबंधन हमले से साफ इंकार कर रहा था। मैंने खुद अपने प्रोफेसर से इसे लेकर बात भी की लेकिन किसी भी तरह के गंभीर हालात होने से साफ इंकार कर दिया और उन्होंने मुझसे यहां तक कहा कि क्लास आगे भी जारी रहेगी। इसलिए क्लास छोड़ना नहीं है। मुझे फिर भी तसल्ली नहीं हुई तो मैं प्रबंधन के पास पहुंचा और वहां भी सवाल किया लेकिन तब भी मुझे यही जवाब मिला, ‘घबराओ मत, कुछ नहीं होगा’।

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मुझे फिर भी विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि 15 फरवरी को भारतीय दूतावास ने सभी लोगों से वतन वापसी की सलाह दी थी। लेकिन तब तक काफी देर हो गई। हाथ में एडवाइजरी की एक कॉपी लेकर मैं कॉलेज घूमता रहा लेकिन सभी जगह मुझे स्थिति सामान्य रहने का दिलासा ही दिया गया।

बाहर भी शहर में इस तरह की कोई हलचल नहीं थी जिसकी वजह से अब मैं भी सोचना लगा कि रूस हमला नहीं करेगा। मैंने अपने परिवार तक को चिंता न करने की सलाह देते हुए सब कुछ ठीक होने की उम्मीद तक जता दी। लेकिन मन में कहीं न कहीं डर था जिसकी वजह से मैंने इंटरनेटर पर टिकट भी लेने का प्रयास किया जो नहीं मिल सका। अब मैं इस इंतजार में हूं कि कब मुझे भारत सरकार एयरलिफ्ट कर स्वदेश वापस ला सके।
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विदेश से आकर भी देना पड़ती है परीक्षा
साल 2017 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने निर्देश जारी करते हुए विदेश या फिर स्वदेश कहीं से भी एमबीबीएस करने पर नेक्सट परीक्षा अनिवार्य की है। साथ ही विदेश या स्वदेशी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले सभी के लिए नीट परीक्षा अनिवार्य है। इस नियम के बाद विदेश और भारत से चिकित्सीय शिक्षा लेना काफी समकक्ष हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस नियम से पहले साल 2012 से 2014 के बीच रूस, यूक्रेन, चीन, बांग्लादेश, कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर भारत आए छात्रों में से 20 फीसदी ही लाइसेंस के लिए राष्ट्रीय परीक्षा पास कर पाए थे।

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