भू-कानून का विरोध करने वालों का मानना है कि प्रदेश में ‘उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था सुधार अधिनियम 1950 संशोधन कानून 2018 को जमीन की खरीद फरोख्त के नियमों को लचीला बना दिया गया। अब कोई भी पूंजीपति प्रदेश में कितनी भी जमीन खरीद सकता है।
इसके तहत पहाड़ में उद्योग लगाने के लिए भूमिधर स्वयं भूमि बेचे या उससे कोई भूमि खरीदेगा तो भूमि को अकृषि कराने के लिए अलग से कोई प्रक्रिया नहीं अपनानी होगी। औद्योगिक प्रायोजन से भूमि खरीदने पर भूमि का स्वत: भू उपयोग बदल जाएगा। अधिनियम की धारा 154 (4) (3) (क) की उपधारा (2) जोड़ी गई। इसके तहत 12.5 एकड़ भूमि की बाध्यता और किसान होने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
समिति की सात दिसंबर को बैठक बुलाई है। जिन्होंने अपने सुझावों के साथ अपना पक्ष रखने को कहा है, उनकी सुनवाई भी की जाएगी। हमने आपत्ति और सुझाव मांगे थे, जो हमें प्राप्त हो चुके हैं। आपत्तियां सुनने के बाद हम रिपोर्ट फाइनल कर देंगे।
- सुभाष कुमार, अध्यक्ष, भू कानून अध्ययन समिति
मुख्यमंत्री भू कानून के मामले में गंभीर हैं। जिस तरह देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम पर उन्होंने जनभावना के अनुरूप निर्णय लिया, उसी तरह भू कानून के मामले में भी निर्णय लेंगे।
- अजेंद्र अजय, सदस्य, भू कानून अध्ययन समिति