पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के पिरूल से बिजली उत्पादन के ड्रीम प्रोजेक्ट का भविष्य एक माह में तय होगा। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रोजेक्ट स्थापित करने वाली संस्था को एक माह का समय दिया गया है। पिरूल से बिजली उत्पादन को लेकर उत्तराखंड रिनिवेबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (उरेडा) केे माध्यम से 21 प्रोजेक्ट आवंटित हुए थे।
छह प्रोजेक्ट लगे थे, जिनमें से कई बंद हो चुके हैं। बाकी भी बंदी की कगार पर हैं। अमर उजाला ने यह खबर 20 अप्रैल के अंक में प्रकाशित की थी। खबर का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधू ने सभी प्रोजेक्ट संचालकों, प्रोजेक्ट आवंटित करने वाले उरेडा और स्थापित करने वाली अवनि बायो एनर्जी की बैठक बुलाई। सोमवार को बैठक में सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम सहित ऊर्जा विभाग के कई अधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक में प्रोजेक्ट संचालकों ने कहा कि पिरूल से बिजली उत्पादन के प्रोजेक्ट चल नहीं पा रहे हैं। वित्तीय रूप से भी यह फायदेमंद नहीं हैं। जबकि प्रोजेक्ट स्थापित करने वाली अवनि एनर्जी का कहना था कि प्रोजेक्ट लगाने वाले लोग इनका संचालन नहीं कर पा रहे हैं।
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सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्य सचिव डॉ.एसएस संधु ने अवनि एनर्जी को निर्देश दिए हैं कि वह किसी एक प्रोजेक्ट पर अपनी टीम को भेजकर उसका एक माह तक संचालन करे। इस पर होने वाली खर्च, यहां से उत्पादित होने वाली बिजली, आने वाले तकनीकी दिक्कतों की पूरी रिपोर्ट बनाकर एक माह में शासन को दे। यह रिपोर्ट उरेडा के माध्यम से ऊर्जा विभाग और मुख्य सचिव को देनी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर पिरूल से बिजली उत्पादन के प्रोजेक्टों का भविष्य तय होगा। इसके बाद ही शासन कोई निर्णय लेगा।