देश के विभिन्न राज्यों में कोयले की कमी के चलते उर्जा संयत्रों के संचालन का संकट गहराने लगा है। ऐसे में राष्ट्रीय ग्रिड में बिजली की मांग भी अचानक बढ़ गई है। बिजली की आपूर्ति को पूरा करने के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने टिहरी एचपीपी और कोटेश्वर एचईपी में बिजली उत्पादन को बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय ग्रिड को टिहरी एचपीपी से एक हजार और कोटेश्वर एचईपी 400 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की जा रही है।
टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड को 25 अगस्त को केंद्र सरकार से टिहरी झील के जलस्तर को 830 मीटर तक बढ़ाने की अनुुमति मिली थी। इसके बाद टीएचडीसीआईएल ने 16 से 31 अक्तूबर तक टिहरी एचपीपी और कोटेश्वर एचईपी से 193 मिलियन यूूनिट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की योजना तैयार की थी। लेकिन बाद में योजना में बदलाव कर बिजली उत्पादन क्षमता के लक्ष्य 401 मिलियन यूनिट तक बढ़ा दिया गया। अब दोनों विद्युत परियोजनाओं से 209 मिलियन यूनिट अतिरिक्त बिजली का उत्पादन हो रहा है।
दोनों विद्युत परियोजनाओं की बिजली उत्पादन क्षमता में इजाफा होने का लाभ राष्ट्रीय ग्रिड को मिलना शुरू हो गया है। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के मुताबिक हाल में बिजली मांग में अचानक बढोत्तरी हुई है। जिसके बाद राष्ट्रीय ग्रिड को जरूरत से अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उत्तराखंड को नहीं मिलेगा कोई खास लाभ
उत्तराखंड राज्य में बिजली संकट के आसार पैदा हो रहे थे। बिजली संकट को टालने के लिए राज्य सरकार को 7.38 रुपये की महंगी दर से दो लाख मिलियन यूूनिट बिजली खरीदनी पड़ी। अब टिहरी एचपीपी और कोटेश्वर एचईपी बिजली उत्पादन बढ़ा है। लेकिन दोनों विद्युत परियोजनाओं में राज्य का कोटा केवल 12 फीसदी है। ऐसे राज्य को फिलहाल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ने का लाभ मिलता नहीं दिख रहा है।