वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू (जनता दल यूनाइटेड) की विधायक लेसी सिंह ने मुख्यमंत्री का बचाव किया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को गलतफहमी करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री हेमब्रोम से केवल एक अभिभावक की तरह बात कर रहे थे। लेसी सिंह ने कहा, 'मैं बैठक में मौजूद थी। शब्दों को अलग-अलग तरह से लिया जा सकता है और कई मतलब निकाले जा सकते हैं। वह केवल यह कह रहे थे कि शराब बंदी का फैसला महिलाओं को लेकर किया गया है।'
बता दें कि बिहार में शराब की बिक्री और सेवन पर अप्रैल 2016 में पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। लेकिन शराब के सेवन की घटनाओं में राज्य में 40 से अधिक लोगों की जान जाने के बाद प्रशासन का यह फैसला आलोचकों के निशाने पर आ गया था। अब प्रदेश में शराब बंदी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए सरकार ने पुलिस को पूरी छूट दे दी है। वहीं, इस दौरान राज्य में शराब बंदी को लेकर कार्रवाई के नाम पर पुलिस प्रताड़ना की कई शिकायतें भी सामने आई हैं।
इसके अलावा पिछले सप्ताह चयनित प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों ने शराब का सेवन न करने की और न दूसरों को करने देने की शपथ ग्रहण की थी। यह शपथ लेने का निर्देश मुख्यमंत्री की ओर से जारी किया गया था। लेकिन, मंगलवार को ही विधानसभा परिसर में बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें मिलने के बाद सरकार के फैसला पर सवाल खड़े हुए। विपक्षी दलों की ओर से भी नीतीश सरकार पर शराब बंदी के कानून को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।