लगातार टिकटॉक वीडियो देखने वाली लड़कियों में किशोरावस्था में ही टिक डिसऑर्डर (आंख, नाक या मुंह हिलाना और अचानक से तेज आवाज निकालना) का खतरा बढ़ रहा है। दुनिया भर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लड़कियों में यह बीमारी देखी जा रही है। द वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के दौरान यह डिसऑर्डर लड़कियों में तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा तनाव, उलझन, चिंता जैसी बीमारियां भी उनमें देखी गई हैं।
करीब 25 साल से प्रैक्टिस कर रहे जर्मनी के डॉ. क्रिस्टेन मिलर बताते हैं कि इस समय युवा और किशोरावस्था में लड़कियों में टिक डिसऑर्डर बढ़ा है। वह बताते हैं कि जिन लोगों में यह डिसऑर्डर होता है, उनके अपने टिक्स होते हैं। सामने आ रहे मामलों में भी ठीक वैसा ही है।
10 गुना बढ़ी बीमारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बीमारी का कोई डाटा राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय तौर पर संकलित नहीं किया गया। हालांकि, कई अस्पतालों में देखा गया है कि यह बीमारी 10 गुना तक बढ़ गई है। कोरोना महामारी से पहले एक अस्पताल में टिक डिसऑर्डर के एक से दो केस सामने आते थे। अब इनकी संख्या 10 से 20 हो गई है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन बच्चों में टिक डिसऑर्डर देखने को मिल रहा है, वे पहले अवसाद या चिंता से ग्रसित हुए। बाद में हालात बिगड़ते गए और उन्हें टिक डिसऑर्डर हो गया।
क्या है टिक डिसऑर्डर
टिक या टूयूरेट सिंड्रोम तंत्रिका तंत्र से जुड़ा डिसऑर्डर है। इसमें व्यक्ति को उसकी मुंह, नाक, गले की मासपेशियों पर नियंत्रण नहीं रह जाता। व्यक्ति अचानक से हिलने-डुलने या आवाज निकालने लग जाता है। इसे ही टिक्स कहा जाता है। इसमें अचानक से हिचकी, अजीब आवाज या मुहं चिढ़ाने जैसी समस्याएं होती हैं । जबकि, व्यक्ति यह जानबूझकर नहीं कर रहा होता है।