तालिबान का चीन के प्रति दोस्ताना रुख अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों को आशंकित कर रहा है। इसी बीच चीन द्वारा तालिबान को धन मुहैया कराए जाने संबंधित चिंता लेकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'तालिबान के साथ चीन की वास्तविक समस्या है। इसलिए वे तालिबान के साथ कुछ समझौता करने की कोशिश करने जा रहे हैं, मुझे यकीन है। जैसा पाकिस्तान करता है, वैसा ही रूस करता है, जैसा ईरान करता है। वे सभी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि तालिबान अब क्या करता है।
बता दें कि तालिबान के चीन की दोस्ती से अफगानिस्तान में रहने वाले उइगर मुसलानों में भय समा गया है। इन मुसलमानों में ये डर समया हुआ है कि तालिबान सरकार चीन को खुश करने के लिए उन्हें जबरन वापस चीन भेज सकती है। जबकि इनमें से कई मुसलमानों का कहना है कि वे सरकारी दमन से बचने के लिए चीन के शिनजियांग प्रांत से भाग कर अफगानिस्तान आए थे।
जानकारों का कहना है कि उइगर मुसलमानों के भयभीत होने की वजहें हैं। उनमें सबसे ज्यादा डर तब पैदा हुआ, जब पिछले जुलाई में तालिबान नेताओं के एक दल ने चीन की यात्रा की। वहां तालिबान और चीन दोनों ने एक दूसरे की तारीफ की। तालिबान ने चीन को अपना ‘अच्छा दोस्त’ बताया और कहा कि वह अपनी जमीन का कभी भी चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा।