अमेरिकी थिंक टैंक जर्मन मार्शल फंड में सीनियर फेलॉट एंड्र्यू स्मॉल ने कहा है कि तालिबान की निवेश में इच्छा जताने से चीन को वहां अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका मिला है। स्मॉल ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा कि चीन शुरुआत में कुछ आर्थिक सहायता देगा। बड़े निवेश की दिशा में वह धीरे-धीरे और सावधानी से आगे बढ़ेगा। इस्लामाबाद स्थित पॉलिसी एनालिस्ट हसन खावर के मुताबिक तालिबान के पास निवेश के लिए ज्यादा विकल्प नहीं हैं। अभी सिर्फ चीन ही ऐसा देश है, जो इसके लिए तैयार है और जिसके पास ऐसा करने की क्षमता है।
जानकारों के मुताबिक अफगानिस्तान से जुड़े फायदों से चीन वाकिफ है। अफगानिस्तान में कई कीमती धातुओं का समृद्ध खनिज भंडार है। इन जानकारों ने ध्यान दिलाया है कि चीनी कंपनी चाइना मेटेलॉर्जिकल ग्रुप ने 2008 में अफगानिस्तान में मौजूद तांबे की खोज और खुदाई के लिए तीन अरब डॉलर का लीज हासिल किया था। लेकिन सुरक्षा संबंधी कारणों से ये कंपनी काम शुरू नहीं कर पाई। अब उसे ऐसा करने का मौका मिल सकता है। तांबे का बिजली के तार बनाने, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं, मोटर पार्ट्स और कई दूसरे उत्पादों में इस्तेमाल होता है।
इस बीच पाकिस्तान ने सीपीईसी में शामिल होने की तालिबान सरकार की इच्छा का स्वागत किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख राशिद अहमद ने कहा कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान की प्रगति एक दूसरे से जुड़ी हुई है। इसे इस बात का संकेत माना गया है कि माफिक समय आते ही अफगानिस्तान इस परियोजना से जुड़ जाएगा।