संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि दुनिया भर में लगभग ढाई करोड़ लोग जबरिया मजदूरी के शिकार हैं। जो लोग ऐसे मजदूरों से काम लेते हैं, वे अकसर उन्हें वेतन नहीं देते, या उनका पासपोर्ट जब्त कर लेते हैं। उन मजदूरों के साथ मार-पिटाई भी की जाती है और कई बार उन्हें जेल मे डाल दिया जाता है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा आयात देश है। इसलिए उससे ये उम्मीद की जाती है कि वह जबरिया मजदूरी के खिलाफ कड़े कदम उठाए।
जानकारों के मुताबिक अमेरिका में पहले इस मामले में ढिलाई बरती जाती थी। लेकिन चीन से उसका टकराव बढ़ने के बाद अब अमेरिकी हवाई अड्डों और बंदरगाहों पर कड़ी निगरानी की जा रही है। लेकिन यह तय करना बड़ी चुनौती बना हुआ है कि आयातित कपड़ा असल में किस स्थान का है। बताया जाता है कि शिनजियांग में तैयार हुए कपड़ा उत्पादों में दूसरे क्षेत्रों के कपास का भी मिलाया जाता है। फिर मुमकिन है कि उसकी प्रोसेसिंग किसी दूसरे देशों में हुई हो। ऐसे में उत्पाद जहां अंतिम रूप से तैयार होता है, वहीं का ठप्पा उस पर लगा दिया जाता है।
जानकारों के मुताबिक सीबीपी अभी भी एक छोटी एजेंसी है। इसलिए अकसर उसे उन गैर-सरकारी संगठनों से मिली सूचना पर निर्भर रहना पड़ता है, जो जबरिया मजदूरी के खिलाफ मुहिम चलाते हैं। इसीलिए तमाम चौकसी के बावजूद शक है कि अभी भी जबरिया मजदूरी से तैयार चीजों का अमेरिका में खूब उपभोग हो रहा है।