पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव की घोषणा होते ही कंजरवेटिव पार्टी ने सबसे पहले अपना घोषणापत्र जारी किया। इससे पार्टी के अंदर आई नई चुस्ती का संकेत मिला है। कंजरवेटिव पार्टी के रणनीतिकारों का उम्मीद है कि अगर जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) का प्रदर्शन मजबूत रहा, तो उसका लाभ कंजरवेटिव पार्टी मिलेगा। लिबरल पार्टी और एनडीपी के वोट आधार में काफी समानता है। इसलिए त्रिकोणीय मुकाबले में हमेशा कंजरवेटिव पार्टी फायदे में रहती है। नए जारी घोषणापत्र के आधार पर पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ट्रुडो को चुनौती देने के मकसद से ओ टूल अपनी पार्टी को मध्यमार्गी रास्ते पर ले आए हैं। इसका मकसद ट्रुडो के उदारवादी समर्थकों को अपनी तरफ खींचना है।
उधर एनडीपी का मकसद अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित है। विश्लषकों के मुताबिक एनडीपी जानती है कि वह चुनाव जीत नहीं सकती। इसलिए उसका मकसद एक बार फिर लिबरल पार्टी को कमजोर करना रहेगा। 2011 और 2015 के आम चुनावों में लिबरल पार्टी के कई गढ़ समझे जाने वाले कई इलाकों में पैठ बनाने में वह सफल रही थी। 2011 में तो वह इसके बूते ही मुख्य विपक्षी दल बन गई थी। इस बार एनडीपी को भरोसा अपने नेता जगमीत सिंह की सागदी भरी जिंदगी पर है। देश में जगमीत सिंह को फिलहाल सबसे लोकप्रिय नेता माना जाता है।