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कनाडा: उलटा भी पड़ सकता है मध्यावधि चुनाव कराने का जस्टिन ट्रुडो का दांव

Sat, 21 Aug 2021 05:52 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ओटावा

सार

कनाडा में मतदान 20 सितंबर को होगा। उसमें ट्रुडो का मुख्य मुकाबला कंजरवेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ टूल से है। अमेरिकी वेबसाइट न्यूज पॉलिटिको.कॉम के मुताबिक एक महीना पहले दोनों विपक्षी पार्टियों का मनोबल गिरा हुआ था। इसलिए जब ट्रुडो ने सदन भंग कराने का फैसला किया, तो उनकी संभावना ज्यादा नहीं समझी गई थी...
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने मध्यावधि चुनाव कराने का जो दांव खेला है, वह उन्हें उलटा भी पड़ सकता है। जिस समय उन्होंने अचानक संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमन्स को भंग कराने का फैसला किया, तब स्थितियां उनके अनुकूल दिख रही थीँ। लेकिन देश में अचानक कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने और अफगानिस्तान में पश्चिमी देशों को लगे झटके के बाद कनाडा में माहौल बदलता दिख रहा है। ताजा जनमत सर्वेक्षणों से उनकी बढ़त गिरने के संकेत मिले हैं।

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कनाडा में मतदान 20 सितंबर को होगा। उसमें ट्रुडो का मुख्य मुकाबला कंजरवेटिव पार्टी के नेता एरिन ओ टूल से है। अमेरिकी वेबसाइट न्यूज पॉलिटिको.कॉम के मुताबिक एक महीना पहले दोनों विपक्षी पार्टियों का मनोबल गिरा हुआ था। इसलिए जब ट्रुडो ने सदन भंग कराने का फैसला किया, तो उनकी संभावना ज्यादा नहीं समझी गई थी। अभी भी वे प्रधानमंत्री ट्रुडो की लिबरल पार्टी से पिछड़ी हुई हैं, लेकिन जो ट्रेंड दिखा है, उसमें ताजा गिरावट ट्रुडो की लोकप्रियता में आई है।

ओ टूल ने कंजरवेटिव पार्टी का चुनाव अभियान शुरू कर दिया है। उन्होंने ओटावा में वर्चुअल स्टूडियो से अपना 163 पेज का घोषणापत्र जारी किया। इसमें उनका सबसे बड़ा वादा जलवायु परिवर्तन रोकने की योजनाओं पर अमल करने का है। इसके अलावा उन्होंने एक साल के अंदर दस नौकरियां पैदा करने का वादा किया है। कंजरवेटिव पार्टी ने भ्रष्टाचार विरोधी एक नया कानून बनाने, मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कार्ययोजना लागू करने, भविष्य की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए दवाओं का भंडार बनाने, देश में वैक्सीन उत्पादन शुरू करने, और संघीय सरकार का राजकोषीय घाटा संतुलित करने का वादा भी किया है।

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पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनाव की घोषणा होते ही कंजरवेटिव पार्टी ने सबसे पहले अपना घोषणापत्र जारी किया। इससे पार्टी के अंदर आई नई चुस्ती का संकेत मिला है। कंजरवेटिव पार्टी के रणनीतिकारों का उम्मीद है कि अगर जगमीत सिंह के नेतृत्व वाली न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) का प्रदर्शन मजबूत रहा, तो उसका लाभ कंजरवेटिव पार्टी मिलेगा। लिबरल पार्टी और एनडीपी के वोट आधार में काफी समानता है। इसलिए त्रिकोणीय मुकाबले में हमेशा कंजरवेटिव पार्टी फायदे में रहती है। नए जारी घोषणापत्र के आधार पर पर्यवेक्षकों ने कहा है कि ट्रुडो को चुनौती देने के मकसद से ओ टूल अपनी पार्टी को मध्यमार्गी रास्ते पर ले आए हैं। इसका मकसद ट्रुडो के उदारवादी समर्थकों को अपनी तरफ खींचना है।

उधर एनडीपी का मकसद अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित है। विश्लषकों के मुताबिक एनडीपी जानती है कि वह चुनाव जीत नहीं सकती। इसलिए उसका मकसद एक बार फिर लिबरल पार्टी को कमजोर करना रहेगा। 2011 और 2015 के आम चुनावों में लिबरल पार्टी के कई गढ़ समझे जाने वाले कई इलाकों में पैठ बनाने में वह सफल रही थी। 2011 में तो वह इसके बूते ही मुख्य विपक्षी दल बन गई थी। इस बार एनडीपी को भरोसा अपने नेता जगमीत सिंह की सागदी भरी जिंदगी पर है। देश में जगमीत सिंह को फिलहाल सबसे लोकप्रिय नेता माना जाता है।
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