अमेरिकी राजनीति में टैरिफ को लेकर टकराव चरम पर पहुंच गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद सख्त रुख अपनाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त वैश्विक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह धारा 122 के तहत नया कार्यकारी आदेश आज ही साइन करेंगे और यह टैरिफ पहले से वसूले जा रहे सामान्य शुल्कों के अतिरिक्त होगा।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब 20 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप के व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया था। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स द्वारा लिखित निर्णय में कहा गया कि 1977 के कानून के तहत राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टैरिफ लगाए। अदालत ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि कर और शुल्क लगाने की शक्ति संविधान के तहत मुख्य रूप से कांग्रेस को प्राप्त है।
ट्रंप का पलटवार
फैसले के बाद ट्रंप ने अदालत के निर्णय को “शर्मनाक” बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी दलीलों को सही तरीके से नहीं सुना गया। उन्होंने यहां तक कहा कि कुछ जजों के रवैये पर भी सवाल उठते हैं। ट्रंप ने दावा किया कि प्रशासन ने पहले से ही “बैकअप प्लान” तैयार कर रखा है और यदि एक कानूनी रास्ता बंद होता है तो अन्य विकल्प मौजूद हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फैसले के समय ट्रंप राज्यों के गवर्नरों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने बैठक के दौरान ही साफ संकेत दे दिए थे कि उनकी सरकार व्यापार नीति में पीछे हटने वाली नहीं है।
धारा 122 और 301 का सहारा
ट्रंप ने कहा कि वह 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। यह प्रावधान राष्ट्रपति को असंतुलित व्यापार की स्थिति में 150 दिनों तक सीमित अवधि के लिए टैरिफ लगाने की अनुमति देता है।
इसके साथ ही प्रशासन ने धारा 301 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कई जांच प्रक्रियाएं शुरू करने की घोषणा की है। ट्रंप का कहना है कि इन जांचों का उद्देश्य अमेरिका को अन्य देशों और कंपनियों की कथित अनुचित व्यापारिक नीतियों से बचाना है। धारा 301 का इस्तेमाल पहले भी विदेशी व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ किया जाता रहा है।
“अमेरिका फर्स्ट” पर जोर
राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया कि उनका लक्ष्य “अमेरिका को फिर से महान बनाना” है और इसके लिए सख्त व्यापार नीति जरूरी है। उनके मुताबिक टैरिफ अमेरिकी उद्योगों और श्रमिकों की रक्षा का प्रभावी हथियार हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अमेरिका के हित में नहीं है और सरकार नई रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।
आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच टकराव को और गहरा कर सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नया कार्यकारी आदेश कानूनी कसौटी पर कितना टिक पाता है और कांग्रेस इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है।