यह मामला अभी हाल ही की खबरों (जनवरी 2026) से जुड़ा है, जहाँ ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने एक जहाज को जब्त कर लिया है और उसमें सवार भारतीय क्रू मेंबर्स (दल के सदस्यों) को हिरासत में ले लिया है। इस घटना ने भारत में, विशेषकर फंसे हुए युवाओं के परिवारों में भारी चिंता पैदा कर दी है।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और ओमान की खाड़ी के पास अक्सर तेल तस्करी के आरोप में जहाजों को रोकने का अभियान चलाया है। ताजा मामला 'एमटी वैलियंट रोर' (MT Valiant Roar) नामक जहाज से जुड़ा है।
ईरानी सुरक्षा बलों ने दिसंबर 2025 के अंत और जनवरी 2026 की शुरुआत के बीच इस जहाज को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र (International Waters) के पास, विशेषकर यूएई के 'डिब्बा पोर्ट' (Dibba Port) के करीब इंटरसेप्ट किया। ईरान का आरोप है कि यह जहाज अवैध रूप से डीजल (ईंधन) की तस्करी कर रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जहाज पर 16 भारतीय क्रू मेंबर्स सवार थे। इन सभी को ईरानी सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया है। ताजा जानकारी (15 जनवरी 2026) के अनुसार, इनमें से 10 लोगों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें ईरानी हिरासत केंद्र (Detention Centre) में ले जाया गया है।
इस घटना में जिस "भारत के लाल" की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, वह हैं जहाज के थर्ड इंजीनियर केतन मेहता। उनके परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भावुक अपील की है, जिससे यह मामला सुर्खियों में आया है।केतन के पिता मुकेश मेहता के अनुसार, उनकी अपने बेटे से आखिरी बात 31 दिसंबर 2025 (नए साल की पूर्व संध्या) को हुई थी। केतन ने बताया था कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन उसके बाद से उनका फोन बंद है और संपर्क टूट गया है।
परिवार को केतन के एक साथी (ऑयलर पोथी दिवाकर) के जरिए पता चला कि ईरानी गार्ड्स ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। केतन की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि "हमारा बेटा निर्दोष है, वह सिर्फ अपनी नौकरी कर रहा था।" उन्होंने भारत सरकार से जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है।
IRGC का दावा है कि 'एमटी वैलियंट रोर' जहाज पर करीब 6,000 मीट्रिक टन ईंधन (डीजल) अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय संपत्ति की चोरी मानता है।ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अपनी ताकत दिखाने के लिए अक्सर ऐसे जहाजों को जब्त करता है जिन पर उसे तस्करी या जासूसी का शक होता है।
फिलहाल, केतन मेहता और उनके 15 साथियों का परिवार दहशत में है। चूंकि ईरान और भारत के रिश्ते पारंपरिक रूप से अच्छे रहे हैं, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि कूटनीतिक बातचीत के जरिए इन भारतीयों को जल्द ही रिहा करा लिया जाएगा। हालांकि, कानूनी दांव-पेंच और "ईंधन तस्करी" के गंभीर आरोपों के कारण इसमें थोड़ा समय लग सकता है। यह घटना मर्चेंट नेवी में काम करने वाले युवाओं के लिए एक चेतावनी भी है कि खाड़ी देशों के विवादित जल क्षेत्रों में काम करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।