पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक राजनीति में एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। अमेरिका और रूस के बीच सीधे संपर्क ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin के बीच फोन पर बातचीत हुई है, जिसमें ईरान के साथ चल रहे युद्ध को जल्द राजनीतिक और कूटनीतिक तरीके से खत्म करने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और कई देशों को आशंका है कि यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। ऐसे माहौल में दुनिया की दो बड़ी शक्तियों के नेताओं के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रूस के राष्ट्रपति के कूटनीतिक सलाहकार Yuri Ushakov ने इस बातचीत की जानकारी देते हुए कहा कि ट्रंप और पुतिन के बीच हुई चर्चा “खुली और रचनात्मक” रही। उनके अनुसार दोनों नेताओं ने ईरान से जुड़े युद्ध और उससे पैदा हो रहे वैश्विक हालात पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
उशाकोव ने बताया कि पुतिन ने इस संघर्ष को जल्द समाप्त करने के लिए कई राजनीतिक और कूटनीतिक विकल्पों का सुझाव दिया। उन्होंने यह भी कहा कि रूस लगातार इस संकट को शांत करने की दिशा में प्रयास कर रहा है और इसके लिए कई देशों के नेताओं से संपर्क बनाए हुए है। पुतिन ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि रूस खाड़ी देशों के नेताओं, ईरान के राष्ट्रपति और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ लगातार संवाद में है, ताकि युद्ध को कूटनीतिक रास्ते से समाप्त किया जा सके।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की अवधि को लेकर अलग संकेत दिए। ट्रंप का कहना है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। उन्होंने इसे “अल्पकालिक सैन्य अभियान” बताते हुए कहा कि अमेरिकी सेना अपनी शुरुआती योजना से भी आगे बढ़ चुकी है और ऑपरेशन तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।
ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि युद्ध के दौरान ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक ईरान की नौसेना, संचार प्रणाली और वायुसेना को गंभीर क्षति हुई है, जिससे उसकी युद्ध क्षमता कमजोर हुई है। हालांकि ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत में सिर्फ युद्ध ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर वैश्विक तेल बाजार और Venezuela की स्थिति पर भी विचार किया गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ऐसे में ट्रंप और पुतिन के बीच हुई यह बातचीत इस बात का संकेत मानी जा रही है कि दुनिया की बड़ी ताकतें युद्ध को सीमित रखने और उसे कूटनीतिक तरीके से समाप्त करने की कोशिश कर रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन कूटनीतिक प्रयासों का पश्चिम एशिया के इस संघर्ष पर कितना असर पड़ता है।