एसआईआर के तहत मतदाता सूची में गलत तरीके से फॉर्म-सात के माध्यम से आपत्तियां लगाने का आरोप लगाते हुए विधायक भुवन कापड़ी व कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम तुषार सैनी से निष्पक्ष जांच करने को कहा। विधायक ने कहा कि पहले ऑनलाइन फॉर्म-सात के माध्यम से आपत्ति दर्ज होने पर वह रात 12 बजे तक अपडेट होकर फॉर्म-10 में दर्ज हो जाती थी। इससे जिस मतदाता के नाम पर आपत्ति लगाई गई है उसका नाम भी स्पष्ट होता था और आपत्ति दर्ज करने वाले व्यक्ति की भी पूरी जानकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध रहती थी लेकिन अब ऑफलाइन तरीके से बड़ी संख्या में आपत्तियां जमा की जा रही हैं और जिन लोगों के नाम पर आपत्तियां लगाई गई हैं उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं है। इससे गांवों में भ्रम और तनाव का माहौल पैदा हो रहा है। विधायक ने कहा कि जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस तरीके से मतदाताओं के नाम काटे जाने का विरोध किया तो करीब 1,000 फॉर्म-सात ऑफलाइन तहसील में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रार कानूनगो कक्ष में जानकारी लेने पर वहां से इन फाॅर्मों को रिसीव किए जाने की जानकारी नहीं दी गई। वहीं एसडीएम के स्टेनो से पूछने पर उसने भी फॉर्म रिसीव करने की जानकारी से इनकार किया। विधायक ने सवाल उठाया कि आखिर करीब 1,000 आपत्तियां तहसील तक पहुंचीं कैसे और इन्हें जमा किसने किया। विधायक ने कहा कि तहसील परिसर की सीसी टीवी फुटेज उपलब्ध कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां जमा करने के लिए कितने लोग तहसील पहुंचे थे। यदि 1,000 आपत्तियां जमा हुई हैं ,तो क्या सैकड़ों लोग इन्हें जमा करने आए या कोई एक व्यक्ति ही बड़ी संख्या में फॉर्म जमा करके चला गया। इसकी जांच होना आवश्यक है। विधायक कापड़ी ने कहा कि जिन लोगों के नाम पर आपत्तियां लगाई गई हैं उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं है, ऐसे में यह गंभीर सवाल है कि आखिर किसने, किसके नाम पर और किस आधार पर ये आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। विधायक कापड़ी ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में भाजपा सरकार के संरक्षण में मतदाताओं के वोट काटने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब ऑनलाइन आपत्तियों की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ी तो अब ऑफलाइन आपत्तियों के जरिये मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है।